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शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

हरतालिका तीज व्रत कैसे करें ,पूजन सामग्री और महत्व

हरतालिका तीज व्रत कैसे करें ,पूजन सामग्री और महत्व

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भारत का प्रमुख त्योहार हरतालिका व्रत भाद्रपद, शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन किया जाता है। इस दिन गौरी-शंकर का पूजन किया जाता है। यह व्रत हस्त नक्षत्र में होता है। इसे सभी कुआंरी यु‍वतियां तथा सौभाग्यवती ‍महिलाएं ही करती हैं। 

इस संबंध में हमारे पौराणिक शास्त्रों में इसके लिए सधवा-विधवा सबको आज्ञा दी गई है। इस व्रत को 'हरतालिका' इसीलिए कहते हैं कि पार्वती की सखी उन्हें पिता-प्रदेश से हर कर घनघोर जंगल में ले गई थी। 'हरत' अर्थात हरण करना और 'आलिका' अर्थात सखी, सहेली।

हरतालिका तीज की पूजन सामग्री :- 
 
हरतालिका पूजन के लिए - गीली काली मिट्टी या बालू रेत। बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल एवं फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनैव, नाडा, वस्त्र, सभी प्रकार के फल एवं फूल पत्ते, फुलहरा (प्राकृतिक फूलों से सजा)। 
 
पार्वती मां के लिए सुहाग सामग्री- मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, बाजार में उपलब्ध सुहाग पुड़ा आदि। श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, घी, दही, शक्कर, दूध, शहद पंचामृत के लिए। 

जानें हरतालिका तीज व्रत कैसे करें :-

* सर्वप्रथम 'उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये' मंत्र का संकल्प करके मकान को मंडल आदि से सुशोभित कर पूजा सामग्री एकत्र करें।

* हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं। प्रदोष काल अर्थात् दिन-रात के मिलने का समय। संध्या के समय स्नान करके शुद्ध व उज्ज्वल वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात पार्वती तथा शिव की सुवर्णयुक्त (यदि यह संभव न हो तो मिट्टी की) प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजा करें। बालू रेत अथवा काली मिट्टी से शिव-पार्वती एवं गणेशजी की प्रतिमा अपने हाथों से बनाएं। 

* इसके बाद सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी सामग्री सजा कर रखें, फिर इन वस्तुओं को पार्वतीजी को अर्पित करें।

* शिवजी को धोती तथा अंगोछा अर्पित करें और तपश्चात सुहाग सामग्री किसी ब्राह्मणी को तथा धोती-अंगोछा ब्राह्मण को दे दें। इस प्रकार पार्वती तथा शिव का पूजन-आराधना कर हरतालिका व्रत कथा सुनें। फिर सर्वप्रथम गणेशजी की आरती, फिर शिवजी और फिर माता पार्वती की आरती करें। तत्पश्चात भगवान की परिक्रमा करें। रात्रि जागरण करके सुबह पूजा के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं। ककड़ी-हलवे का भोग लगाएं और फिर ककड़ी खाकर उपवास तोड़ें, अंत में समस्त सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी या किसी कुंड में विसर्जित करें। 

इसी त्योहार को दूसरी ओर बूढ़ी तीज भी कहा जाता हैं। इस दिन सास अपनी बहुओं को सुहागी का सिंधारा देती हैं। 

इस व्रत को करने से कुंआरी युवतियों को मनचाहा वर मिलता है और सुहागिन स्त्रियों के सौभाग्‍य में वृद्धि होती है तथा शिव-पार्वती उन्हें अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान देते हैं

जानें हरतालिका तीज व्रत के ये 7 नियम

जानें हरतालिका तीज व्रत के ये 7 नियम

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हिन्दु धर्म की मान्यताओं में सुहागिन महिलाओं का मुख्य व्रत हरितालिका तीज माना जाता है।हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है जो कि इस बार 2 सितंबर दिन सोमवार को है। हरतालिका तीज का व्रत महिलाएं अपने पति की दीर्घायु होने की कामना से करती हैं और कुवारी युवतियां सुंदर पति पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। पंचाग के अनुसार, तृतीया तिथि रविवार को दिन 11:21 बजे के बाद शुरू होगी। जो सोमवार सुबह 9:01 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के कारण सोमवार को तृतीया तिथि शास्त्रों के अनुसार मानी जाएगी। भगवान शिव और पार्वती का पूजन सुहागिन व कुंवारी कन्याएं शाम 7:54 बजे तक पूजाअर्चन करना होगा। क्योंकि शाम 7:56 बजे से भद्रा लग जाएगा। 

इस व्रत कठिन नियमों को चलते इसे सबसे ज्यादा कठिन व्रत माना जाता है। जानें इसके कुछ खास नियम-

1- यदि आप एक बार हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं, तो फिर आपको यह व्रत हर साल रखना होता है। किसी कारण यदि आप व्रत छोड़ना चाहते हैं तो उद्यापन करने के बाद अपना व्रत किसी को दे सकते हैं।

2- हरतालिका तीज व्रत के दौरान महिलाएं बिना अन्न और जल ग्रहण किए 24 घंटे तक रहती हैं। हलांकि कुछ इलाकों में इसके दूसरे नियम भी हो सकते हैं।

3- मान्यता है कि यह व्रत विधवा महिलाओं को नहीं करना होता।

4- इस व्रत में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा विधि विधान से की जाती है।

5- पूजा के पश्चात सुहाग की समाग्री को किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर के पुरोहित को दान करने का चलन है।

6- इस व्रत के दौरान रात में जागरण करने का भी नियम है। यानी रात में सोया नहीं जाता।

7- अगले दिन शिव-पार्वती की पूजा करने बाद और प्रसाद बांटने के बाद ही प्रसाद ग्रहण किया जाता है। 

हालांकि हमारी सलाह कि सेहत ठीक न हो तो  ऐसे कठिन नियमों को पालन करने में सख्ती नहीं बरतनी चाहिए।

हरतालिका तीज 2019 - हरतालिका तीज व्रत 1 या 2 सितंबर जानें सही तिथि मुहूर्त

हरतालिका तीज 2019 - हरतालिका तीज व्रत 1 या 2 सितंबर जानें सही तिथि मुहूर्त 

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सौभाग्य का व्रत हरतालिका तीज भाद्र शुक्ल तृतीया तिथि को किया जाता है। भगवान शिव और पार्वती को समर्पित इस व्रत को लेकर इस बार उलझन की स्थिति बनी हुई है। व्रती इस उलझन में हैं कि उन्हें किस दिन यह व्रत करना चाहिए। दरअसल इस उलझन की वजह यह है कि इस साल पंचांग की गणना के अनुसार तृतीया तिथि का क्षय हो गया है यानी पंचांग में तृतीया तिथि का मान ही नहीं है।

1 सितंबर को सूर्योदय द्वितीया तिथि में होगा जो 8 बजकर 27 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसके बाद से तृतीया यानी तीज शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 2 सितंबर को सूर्योदय से पूर्व ही सुबह 4 बजकर 57 मिनट पर तृतीया समाप्त होकर चतुर्थी शुरू हो जाएगी।

हरतालिका तीज व्रतियों के लिए उलझन की बात यह है कि उन्हें व्रत किस दिन करना चाहिए। आपको बता दें कि इस विषय पर ना सिर्फ व्रती बल्कि ज्योतिषशास्त्री और पंचांग के जानकर भी दो भागों में बंटे हुए हैं। एक मत के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 1 सितंबर को करना शास्त्र सम्मत होगा क्योंकि यह व्रत हस्त नक्षत्र में किया जाता है जो एक सितंबर को है। 1 सितंबर को पूरे दिन तृतीया तिथि होगी। संध्या पूजन के समय भी तृतीया तिथि रहेगी जिससे व्रत के लिए 1 सितंबर का दिन ही सब प्रकार से उचित है। 2 तारीख को सूर्योदय चतुर्थी तिथि में होने से इस दिन चतुर्थी तिथि का मान रहेगा ऐसे में तृतीया तिथि का व्रत मान्य नहीं होगा।

2 सितंबर को हरतालिका तीज को उचित मानने वाले विद्वानों का तर्क है कि शास्त्रों में चतुर्थी तिथि व्याप्त तृतीया तिथि को सौभाग्य वृद्धि कारक माना गया है। इनके अनुसार ग्रहलाघव पद्धति से बने पंचांग के अनुसार 8 बजकर 58 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि हो जाएगी। हरतालिका व्रत में एक नियम यह भी है कि हस्त नक्षत्र में व्रत करके चित्रा नक्षत्र में व्रत का पारण करना चाहिए। इस लिहाज से 2 सितंबर को तीज का व्रत रखना उचित और सौभाग्य वृद्धि कारक होगा। इन स्थितियों इस साल 2 दिन हरतालिका तीज का व्रत रखा जा सकता है।

हरतालिका तीज व्रत पूजन मुहूर्त

जो व्रती 1 सितंबर को हरतालिका तीज का व्रत रख रहे हैं उनके लिए पूजन का शुभ मुहूर्त शाम में 6 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 58 मिनट तक है।
2 सितंबर को व्रत रखने वालों को सूर्योदय से 2 घंटे के अंदर ही तीज का पूजन कर लेना होगा। इनके पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 58 मिनट तक है।

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