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शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

सावन 2019: दूसरे और तीसरे सोमवार को बन रहा दुर्लभ संयोग, ऐसा करने से दूर होंगे सारे कष्ट

सावन 2019: दूसरे और तीसरे सोमवार को बन रहा दुर्लभ संयोग, ऐसा करने से दूर होंगे सारे कष्ट



महादेव का प्रिय सावन का महीना शुरू हो गया है। इस बार सावन में चार सोमवार आएंगे। 29 जुलाई को सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है। वहीं पांच अगस्त को सोमवार और नाग पंचमी के संयोग का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव के पूजन-अर्चना से भोले बाबा की कृपा बरसती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शंकर का महीना माना जाता है। शिव का अर्थ कल्याण है। कहा जाता है कि कण-कण में भगवान शिव का वास है। वेदों में उनका साकार और निराकार का वर्णन किया गया है। भगवान शिव क्षण में ही पसीज कर भक्तों को अभय प्रदान करते हैं।

सावन में सोमवार को भगवान शिव की पूजा अत्यधिक फलदायी मानी जाती है। सावन शुरू होते ही जगह-जगह बोल बम के नारे गूंजने लगते हैं। इस बार सावन में कुल चार सोमवार का संयोग बन रहा है। इसमें 22 जुलाई, 29 जुलाई, 5 अगस्त और 12 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार पड़ेगा।

सावन की शिवरात्रि 30 जुलाई मंगलवार को मनाई जाएगी। विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट के अनुसार सोमवार को प्रदोष व्रत और नागपंचमी का योग श्रेष्ठ होता है। बताया कि सावन में भगवान शिव का अभिषेक किया जाना चाहिए।

भगवान शिव के सिर पर स्थित चंद्रमा अमृत का द्योतक है। गले में लिपटा सर्प काल का प्रतीक है। इस सर्प अर्थात काल को वश में करने से ही शिव मृत्युंजय कहलाए। उनके हाथों में स्थित त्रिशूल तीन प्रकार के कष्टों दैहिक, दैविक और भौतिक के विनाश का सूचक है। उनके वाहन नंदी धर्म का प्रतीक हैं। हाथों में डमरू ब्रह्म निनाद का सूचक है।

सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से होते हैं यह चमत्कारी फायदे

सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से होते हैं यह चमत्कारी फायदे

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सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में जो व्यक्ति हर रोज शिवलिंग पर जल चढ़ता है उसकी मनोकामना जल्दी पूरी हो जाती है। सावन का महीना इसलिए खास है क्योंकि इस समय खास मंत्रों से शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। ज्योतिष नजरिए से भी सावन के पावन महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से कई तरह के लाभ मिलते हैं।

ऐसी मान्यता है जो व्यक्ति नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाता है उसकी कुंडली में अशुभ ग्रहों का प्रभाव कभी नहीं रहता। सावन के महीने में इसका महत्व और काफी बढ़ जाता है।

अगर कोई भक्त सावन के महीने में पारद शिवलिंग पर जल चढ़ाता है उसको धन-सम्पदा और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

मिट्टी से बना हुआ (पार्थिव) शिवलिंग सभी सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला माना गया है। शिवलिंग का अभिषेक करने से व्यक्ति के ग्रह-गोचर अनुकूल होने लगते हैं। घर से नकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए दूर चली जाती है।

शनिवार, 20 जुलाई 2019

सावन में महिलाएं इस वजह से पहनती हैं हरी चूड़ियां जानिये उसका महत्त्व

सावन में महिलाएं इस वजह से पहनती हैं हरी चूड़ियां जानिये उसका महत्त्व 

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सावन का पवित्र महीना 17 जुलाई से शुरू हो गया है. शिव भक्तों के लिए यह महीना बेहद खास होता है पर सुहागनों के लिए भी किसी पर्व से कम नहीं.
सावन में सुहागनें हरी चूड़ियां जरूर पहनती हैं. पर क्‍या आप जानते हैं कि सावन में हरी चूड़ियों का महत्‍व क्‍या है?
सावन और हरा रंग
सावन यानी बारिश. चारों और हरियाली. भीषण गर्मी के बाद हर ओर हरियाली दिखने लगती है. लोगों के मन में उल्‍लास होता है.
प्रकृत्ति का रंग है हरा. इसलिए इस माह में हरे रंग को पहनने का बड़ा कारण ये है कि इसे सुहाग का प्रतीक माना जाता है. चूंकि सावन में शिव पूजा करने का विधान है, इसलिए महिलाएं हरे रंग की चूडि़यां पहनती हैं, जिससे उन्‍हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिले.
अब आप सोच रहे होंगे कि भगवान शिव का हरे रंग से क्‍या संबंध. दरअसल, भगवान शिव प्रकृत्ति के बीच ही रहते हैं. वहीं उनका निवास है. उन्‍हें जो बेल या धतूरा चढ़ाया जाता है वो भी हरे रंग का होता है, इसलिए हरा रंग उन्‍हें भाता है. ऐसी मान्‍यता है कि सावन में हरे रंग को पहनने से वे खुश होते हैं.
एक और मान्‍यता है. चूंकि हमारे धर्मग्रंथों में हरियाली का पूजन होता आया है. पेड़ों आदि की पूजा का विधान है. ऐसा करने से हम प्रकृत्ति के प्रति अपना आभार व्‍यक्‍त करते हैं. इस रंग को पहनने से प्रकृत्ति का भी आशीर्वाद मिलता है.
क्‍या खाएं क्‍या नहीं
हरी सब्जियों को खाना मना होता है. इसकी वजह ये है कि इस महीने में हरी पत्तेदार सब्जियां शरीर में वात को बढ़ाती हैं. कच्चे दूध के सेवन की मनाही होती है. सावन के दौरान कढ़ी भी खाने की मनाही होती है. मांस-मच्‍छी के सेवन की मनाही होती है. इसी तरह लहसुन, प्‍याज के सेवन से बचने को कहा जाता है. इस समय में तामसिक प्रवृत्ति के भोजनों को ना खाने की परंपरा इसका कारण है.
सावन के सोमवार
इस बार सावन में 4 सोमवार आएंगे. पहला सोमवार 22 जुलाई 2019 को है. दूसरा 29 जुलाई को और तीसरा सोमवार 5 अगस्त को है. इसी बीच 31 जुलाई 2019 को हरियाली अमावस्या भी है. चौथा और सावन का आखिरी सोमवार 12 अगस्त को है. 15 अगस्त को सावन का आखिरी दिन है.
बहुत से लोग सावन या श्रावण के महीने में आने वाले पहले सोमवार से ही 16 सोमवार व्रत की शुरुआत करते हैं. सावन महीने की एक बात और खास है कि इस महीने में मंगलवार का व्रत भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के लिए किया जाता है. श्रावण के महीने में किए जाने वाले मंगलवार व्रत को मंगला गौरी व्रत कहा जाता है.

बुधवार, 17 जुलाई 2019

सावन में सोमवार का व्रत रखें, तो बरतें ये सवाधानियां, व्रत में क्या खाएं ,क्या न खाएं

सावन में सोमवार का व्रत रखें, तो बरतें ये सवाधानियां, व्रत में क्या खाएं ,क्या न खाएं

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सावन में सोमवार का व्रत रखने से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं हैं, लोगों का मानना है कि श्रावण सोमवार के व्रत रखने से अच्छा और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है. सावन के दौरान रखे जाने वाले इन व्रतों को सावन के चार सोमवार व्रत के तौर पर जाना जाता है. इस सावन का पहला सोमवार 17 जुलाई को होगा. सोमवार के व्रत खास तौर पर कुवांरी कन्याओं के लिए होता है, क्योंकि इसे रखने से मनचाहा वर मिलने की मान्यता है. व्रत रखने का मतलब है पूरे दिन अन्न न लेना. ऐसे मे सेहत से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती है. अचानक से अपने रोजमर्रा के आहार में बदलाव करना और कम आहार लेना आपकी सेहत के लिए कई मायनों में खतरनाक हो सकता है. ऐसे में व्रत के दौरान अपनी सेहत से जुड़ी सवाधानियां बरतना भी जरूरी है, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे आप भक्ति और सेहत का संतुलन बना सकते हैं-

चार सोमवार के व्रत रखते हुए डाइट टिप्स 

व्रत के दौरान कुछ लोग एक समय का खाना खाते हैं, तो कई लोग पूरा दिन फलहाल पर ही हैं. इस दौरान ख्याल रखा जाना चाहिए कि कम खाना या भूखा रहना आपके स्वास्थ्य को किसी तरह से हानि न पहुंचाए. व्रत रखते समय कई बातों का ध्यान रखने की जरूरत है जैसे- 

- इस बात का ध्यान रखें कि हर दिन आपके शरीर को जरूरी मात्रा में पोषक तत्व मिलें. 

- खाली पेट न रहें और ज़्यादा से ज़्यादा तरह पदार्थ लेते रहें. ऐसा करने से शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी और साथ ही डिहाइड्रेशन से भी बचे रहेंगे. 

सावन 2019 में अगर आप सोमवार के व्रत रख रहे हैं तो डाइट में फलों को शामिल करें. 

व्रत में क्या न खाएं 

- पुराना बचा कूट्टू या सिंघाड़े का आटा इस्तेमाल न करें. यह कुछ समय बात खराब हो जाता है. ऐसे में इसे खाने से डायरिया होने का खतरा बढ़ जाता है. 

- बर्फी, लड्डू और फ्राइड आलू जैसी तली और अत्यधिक चीनी वाली चीजों को खाने से बचें.

- अगर आप ज्यादा तला-भुना, मीठा या बिना नमक का खाना ले रहे हैं तो यह आपको ब्लडप्रेशर से जुड़ी समस्या दे सकता है. 

- तला-भुना खाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. यह वजन बढ़ाने का काम कर सकता है या शुगर को भी प्रभावित कर सकता है. 

- इस मौसम में तला-भुना खाने से बचें. बारिश के मौसम में यह संक्रमण या अपच की समस्या पैदा कर सकती है.

- खाली पेट रहने से एसिडिटी हो सकती है, ऐसे में ठंडा दूध लें और थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाते रहें.

- अगर आपको डायबिटीज की शिकायत है, तो इस बात का खास ध्यान रखें कि आप ज्यादा देर तक खाली पेट न रहें. कुछ न कुछ खाते रहें और भरपूर पानी पिएं.

व्रत में क्या खाएं

- व्रत के दौरान क्योंकि आप अनाज नहीं खाते इसलिए जरूरी है कि आप संतुलित भोजन लें.

- अगर आप सिर्फ फ्रूट्स खाते हैं और पानी कम पीते हैं तो कब्ज या शारीरिक कमजोरी महसूस हो सकती है. 

- कुट्टू के आटे की रोटी या इडली भी आपके स्वाद और सेहत के लिए अच्छी साबित होगी.

- व्रत में खाए जाने वाले सामक के चावल आप पका सकते हैं अगर थोड़ा स्वाद भी पाना चाहते हैं तो इससे बना डोसा खा सकते हैं. 

- लौकी, कद्दू या खीरे का रायता आपके खाने में एड ऑन होगा.

- आप खुद को एनर्जी देने के लिए लस्सी, मिल्करशेक, जूस वगैरह ले सकते हैं.

- जब भूख ज्यादा लगी हो तो ड्राई फ्रूट खा लें.

सावन के सोमवार को करें ये उपाय, प्रसन्न होते हैं भगवान शिव और करते हैं हर इच्छा पूरी

सावन के सोमवार को करें ये उपाय, प्रसन्न होते हैं भगवान शिव और करते हैं हर इच्छा पूरी

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भगवान शिव की भक्ति और पूजा अर्चना का प्रमुख माह सावन बुधवार 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। वैसे तो पूरे सावन माह में 'बम बम भोले' की जयकार गूंजती रहती है लेकिन इस माह के सोमवार को भगवान शिव के अभिषेक का विशेष महत्व होता है।


सावन के महीने में सोमवार के दिन श्रद्धालु शिवालयों में जाकर भोलेनाथ की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। श्रावण के सोमवार को शिव की आराधना को सर्वसुलभ माना गया है। आषाढ़ की पूर्णिमा यानि गुरू पूर्णिमा के बाद श्रावण माह की शुरुआत हो जाएगी और इस महीने में प्रति सोमवार को शिव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। पहले सोमवार से लेकर प्रत्येक सोमवार को शिवपुराण के ये छोटे-छोटे उपाय कर सकते हैं। आपकी हर इच्छा पूरी जीवन के संहारक भगवान शिव को मात्र जल अर्पित कर मन से की गई आराधना उनको खुश करने के लिए बहुत है। इस वजह से उन्हें भोलेनाथ बाबा भी कहा जाता है।

भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने के लिए इसी तरह के कुछ छोटे और अचूक उपायों के बारे में शिवपुराण में भी लिखा हुआ है। ये उपाय इतने बेहद ही आसान भी हैं।


शिवपुराण में हर समस्या के समाधान हेतु एक अलग उपाय बताया गया है।

शिवपुराण अनुसार, इन उपायों से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव और करते हैं हर इच्छा पूरी :-

  • सावन के महीने में रोज 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढाने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
  • घर में अगर किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सावन के महीने में रोज सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करें एंव गुग्गल का धूप दें।
  • यदि आपके विवाह में अड़चन है तो सावन में रोज शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध चढ़ाएं।
  • सावन में रोज नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाने से जीवन में सुख-समृद्धि आएगी एंव मन प्रसन्न रहेगा।
  • सावन में गरीबों को भोजन कराने से आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी तथा पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।
  • सावन में रोज सुबह किसी शिव मंदिर में जल अभिषेक कर काले तिल अर्पण करें और मन ही मन में ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इस उपाय से मन को शांति मिलेगी।
  • किसी नदी या तालाब जाकर आटे की गोलियां मछलियों को खिलाते समय मन ही मन में भगवान शिव का ध्यान करते रहने से धन प्राप्ति होती है।

सावन सोमवार के दिन सभी कष्टों से मुक्‍ति पाने के लिए करे ये खास उपाय

सावन सोमवार के दिन सभी कष्टों से मुक्‍ति पाने के लिए करे ये खास उपाय

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भगवान शिव की पूजा और साधना कृपा बरसाने वाली होती है। शिव जी को प्रसन्न करने के लिये पार्थिव लिंग पूजन का विशेष महत्व होता है। कलयुग में कूष्माण्ड ऋषी के पुत्र मंडप नें पार्थिव पूजन प्रारम्भ किया। शिव महापुराण के अनुसार पार्थिव पूजन से धन, धान्य, आरोग्य और पुत्र की प्राप्ति होती है। पार्थिव पूजन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

शिव जी की अराधना के लिए पार्थिव पूजन सभी लोग कर सकते हैं, फिर चाहे वह पुरुष हो या फिर महिला। यह सभी जानते हैं कि शिव कल्याणकारी हैं। जो पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजन अर्चना करता है, वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है।

शिवपुराण में लिखा है कि पार्थिव पूजन सभी दुःखों को दूर करके सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है। यदि प्रतिदिन पार्थिव पूजन किया जाय तो इस लोक तथा परलोक में भी अखण्ड शिव भक्ति प्राप्त होती है। आइये इस विषय पर जाने-माने ज्‍योतिष के जानकार सुजीत जी महाराज से जानते हैं कि पार्थिव पूजा कैसे करनी चाहिए।

जानें, कैसे करते हैं पार्थिव पूजन और इससे क्‍या लाभ मिलते हैं 

पार्थिव पूजन करने से पहले पार्थिव शिवलिंग बनाइए। इसको बनाने के लिए किसी पवित्र नदी या तालाब की मिट्टी लें। फिर उस मिट्टी को पुष्प चंदन इत्यादि से संशोधित करें। मिट्टी में दूध मिलाकर शोधन करें।

शिवलिंग बनाने के बाद करें इन देवों की पूजा 

शिवलिंग बनाने के बाद श्री गणेश जी, श्री विष्णु जी, नव ग्रह और माता पार्वती आदि का आह्वान करना चाहिए। फिर विधिवत तरीके से षोडशोपचार करना चाहिए।

परम ब्रम्ह मानकर करें पूजा और ध्‍यान 

पार्थिव बनाने के बाद उसे परम ब्रम्ह मानकर पूजा और ध्यान करें। पार्थिव शिवलिंग समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। सपरिवार पार्थिव बनाकर शास्त्रवत विधि से पूजन करने से परिवार सुखी रहता है।

रोग से पीड़ित लोग करें महामृत्युंजय जाप 

पार्थिव के समक्ष समस्त शिव मंत्रों का जप किया जा सकता है। रोग से पीड़ित लोग महामृत्युंजय मंत्र का जप भी कर सकते हैं। दुर्गासप्तशती के मंत्रों का जप भी किया जा सकता है। पार्थिव के विधिवत पूजन के बाद उनको श्री राम कथा भी सुनाकर प्रसन्न कर सकते हैं।

सावन महीना 2019 - 17 जुलाई से शुरू हो रहा है पवित्र सावन का महीना, जानें सोमवार व्रत, कथा और महत्व

सावन महीना 2019 - 17 जुलाई से शुरू हो रहा है पवित्र सावन का महीना, जानें सोमवार व्रत, कथा और महत्व

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साल 2019 में सावन का महीना बेहद खास है. हालांकि इस महीने की शुरुआत होने में अभी कर्ई दिन बाकी हैं. इस बार सावन के महीन की शुरुआत 17 जुलाई से हो रही है. सावन के महीने की शुरुआत से ही व्रत और त्योहारों की भी शुरुआत हो जाती है. सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. सभी शिव भक्त इस दौरान भगवान शंकर की पूरे महीने पूजा, आराधना करते हैं. आइए हम आपको बताते हैं कि सावन के महीने भगवान शिव की पूजा किस तरह से करें.

पौराणिक कथाओं के अनुसार जो व्यक्ति सावन के पवित्र महीने में पूरे मनोयोग से भगवान शिव की उपासना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान शंकर पूरी करते हैं. इसी सावन महीने में कावड़ यात्रा भी शुरू होती है जिसके तहत लाखों की संख्या में श्रद्धालु पैदल चलकर हरिद्वार शिवलिंग पर जल चढ़ाने जाते हैं.

हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक सावन का महीना भगवान शिव के अलावा मां पार्वती की पूजा आराधना के लिए भी सर्वेत्तम है. ऐसी मान्यता है कि जो भक्त पूरे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करता है उस पर शिव पार्वती की असीम अनुकंपा होती है. जहां शादीशुदा महिलाएं अपने आगामी जीवन को सुखमय बनाने के लिए उनकी प्रार्थना करती हैं वहीं दूसरी तरफ कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति हेतु शिव पार्वती की पूजा करती हैं. इसके अलावा नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे त्योहार भी सावन में मनाए जाते हैं.

इस साल यानी 2019 में सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई को पड़ेगा. वैसे सोमवार का दिन भगवान शिव का माना जाता है. अगर सावन का महीना हो और उसमें सोमवार का दिन हो तो इससे बेहतर दिन कोई हो नहीं सकता. देशभर में स्थित शिव मंदिरों में सावन के सोमवार वाले दिन भक्तों की भीड़ उमड़ती है. वहीं इस साल सावन का आखिरी दिन 15 अगस्त को होगा. 

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