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मंगलवार, 11 अगस्त 2020

जन्माष्टमी 2020 : व्रत में न करें ये 6 काम, नहीं मिलता पूजा का फल





 जन्माष्टमी का पर्व हर सल भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह अष्टमी तिथ 11 अगस्त को सुबह 09:06 बजे शुरू हो रही है और 12 अगस्त को सुबह 11:16 बजे समाप्त हो रही है। यानी अष्टमी तिथि मंगलवार की सुबह से बुधवार को 11 बजे तक है। ऐसे में इस साल 11 और 12 अगस्त को दो दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। कुछ लोग 11 अगस्त को व्रत कर रहे हैं तो कुछ 12 अगस्त को व्रत कर रहे हैं। लेकिन अष्टमी तिथि में रोहिण नक्षत्र नहीं है। लेकिन धर्माचार्यों के अनुसार, लोग 12 अगस्त को रात 12:05 बजे से 12:48 बजे की बीच शुभ मुहूर्त में जन्माष्टमी पूजा कर सकते हैं।

देशभर में कोरोना वायरस महामारी संकट को देखते हुए मथुरा के प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं लेकिन इस दौरान भक्तोंका प्रवेश वर्जित रहेगा। लोग अपने घरों से जन्माष्टमी उत्सव का लाइव प्रसारण देख सकेंगे।

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, प्रत्येक धार्मिक उत्सव या व्रत के अपने कुछ नियम व मान्यताएं होती हैं। कहा जाता है कि इन मान्यताओं का पालन करने पर ही व्रत/पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है। आगे जानिए जन्माष्टमी कौन से काम नहीं करना चाहिए।

 

जन्माष्टमी व्रत में न करें ये 6 काम
1- किसी का अनादर न करें
भगवान ने प्रत्येक इंसान को समान बनाया है इसलिए किसी का भी अमीर-गरीब के रूप में अनादर या अपमान न करें। लोगों से विनम्रता और सहृदयता के साथ व्यवहार करें। आज के दिन दूसरों के साथ भेदभाव करने से जन्माष्टमी का पुण्य नहीं मिलता।


2- तामसिक आहार न लें मान्यता है कि जिस घर में भगवान की पूजा की जाती हो या कोई व्रत रखता हो उस घर के सदस्यों को जन्माष्टमी के दिन लहसुन और प्याज जैसी तामसिक चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस दिन पूरी तरह से सात्विक आहार की ग्रहण करना चाहिए।

3- ब्रह्मचर्य का पालन करें मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन स्त्री-पुरुष को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ऐसा न करने वालों को पाप लगता है।

4- गायों को न सताएं मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण को गौ अति प्रिय हैं। इस दिन गायों की पूजा और सेवा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। किसी भी पशु को सताना नहीं चाहिए।

5- चावल या जौ का सेवन न करें। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी और जन्माष्टमी के दिन चावल या जौ से बना भोजन नहीं खाना चाहिए। चावल को भगवान शिव का रूप भी माना गया है।

6- रात 12 से पहले न खालें व्रत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी का व्रत करने वाले को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होने तक यानी रात 12 बजे तक ही व्रत का पालन करन चाहिए। इससे पहले अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। बीच में व्रत तोड़ने वालों को व्रत का फल नहीं मिलता।

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

जन्माष्टमी पर्व तिथि व मुहूर्त 2019

जन्माष्टमी 2019



देवताओं में भगवान श्री कृष्ण विष्णु के अकेले ऐसे अवतार हैं जिनके जीवन के हर पड़ाव के अलग रंग दिखाई देते हैं। उनका बचपन लीलाओं से भरा पड़ा है। उनकी जवानी रासलीलाओं की कहानी कहती है, एक राजा और मित्र के रूप में वे भगवद् भक्त और गरीबों के दुखहर्ता बनते हैं तो युद्ध में कुशल नितिज्ञ। महाभारत में गीता के उपदेश से कर्तव्यनिष्ठा का जो पाठ भगवान श्री कृष्ण ने पढ़ाया है आज भी उसका अध्ययन करने पर हर बार नये अर्थ निकल कर सामने आते हैं। भगवान श्री कृष्ण के जन्म लेने से लेकर उनकी मृत्यु तक अनेक रोमांचक कहानियां है। इन्ही श्री कृष्ण के जन्मदिन को हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले और भगवान श्री कृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिये भक्तजन उपवास रखते हैं और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं।

कब हुआ श्री कृष्ण का जन्म

जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को ही कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों के मतानुसार श्री कृष्ण का जन्म का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। अत: भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी भाग्यशाली माना जाता है इसे जन्माष्टमी के साथ साथ जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

जन्माष्टमी पर्व तिथि व मुहूर्त 2019

जन्माष्टमी 2019
24 अगस्त
निशिथ पूजा– 00:01 से 00:45
पारण– 05:59 (24 अगस्त) सूर्योदय के पश्चात
रोहिणी समाप्त- सूर्योदय से पहले
अष्टमी तिथि आरंभ – 08:08 (23 अगस्त)
अष्टमी तिथि समाप्त – 08:31 (24 अगस्त)

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