बुधवार, 31 अक्टूबर 2018
अहोई अष्टमी 2018: अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और आरती का तरीका
साल 2018 में अहोई अष्टमी व्रत 31 अक्टूबर को है। इस व्रत का हमेशा से ही महत्व बहुत अधिक रहा है। इस व्रत में स्याहु माता की उपासना की जाती है। यह माता संतान का सुख देने वाली है। इसलिए बात जब संतान के भले के लिए आराधना की आती है तो स्याहु माता का व्रत सबसे पहले किया जाता है।
यह व्रत अपने आप में अनूठा है। इस दिन माताएं अपनी संतानों की दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए स्याहु माता का व्रत करती है। और उनसे अपनी संतान के कल्याण की प्रार्थना करती है। इस दिन माताओं को अपनी संतान के लिए अवश्य ही व्रत करना चाहिए। इस व्रत में तारों को अर्घ्य देकर पूजा सम्पन्न मानी जाती है।
पूजा समय 31 अक्तूबर 2018 बुधवार - सांय 05:45 से 07:02 तक
तारों के दिखने का समय 31 अक्तूबर 2018 बुधवार - 06:12 बजे
एक साहूकार के 7 बेटे और एक बेटी थी। साहुकार ने सभी की शादी कर दी। अब उसके घर में सात बेटों के साथ सातबहुंएं भी थीं। साहुकार की बेटी दिवाली पर अपने ससुराल से मायके आई। दिवाली पर घर को लीपना था, इसलिए सारी बहुएं जंगल से मिट्टी लेने गईं। भाभियों के साथ साहुकार की बेटी भी गई।
साहूकार की बेटी जहां से मिट्टी ले रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने सात बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी लेते में बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया। इस पर क्रोधित होकर स्याहु ने कहा कि मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी।
स्याहु के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। सबसे छोटी भाभी ननद मान जाती है। फिर छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं, वे सात दिन बाद मर जाते हैं।
जब उसने निराश हो पण्डित जी से उपाय पूछा तो उन्होंने बताया पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी। ननद ने ऐसा ही किया। गाय की खूब सेवा की। सुरही गाय ने प्रसन्न हो उनसे वर मांगने को कहा। तब ननद बोली कि मेरे बच्चे नहीं होते है क्योकि स्याहु माता के श्राप से मेरी कोख बंधित है। आप मुझ पर कृपा करें जिससे मुझे संतान सुख मिले।
गाय माता ननद को स्याहु माता के पास लेकर गई। वहां रहकर वो स्याहु माता की पूजा कर उनसे आशिर्वाद रूप में संतान का सुख मांगती है। माता उसे वरदान देती है कि तेरे सारे बच्चे तुझे वापस मिल जाएंगे।
अहोई का अर्थ एक यह भी होता है 'अनहोनी को होनी बनाना।' जैसे साहूकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था। जिस तरह अहोई माता ने उस साहूकार की बहु की कोख को खोल दिया, उसी प्रकार इस व्रत को करने वाली सभी नारियों की अभिलाषा पूर्ण करें।
जय अहोई माता जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावत हरी विष्णु धाता।।
ब्रम्हाणी रुद्राणी कमला तू ही है जग दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता।।
तू ही है पाताल बसंती तू ही है सुख दाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।।
जिस घर थारो वास वही में गुण आता।
कर न सके सोई कर ले मन नहीं घबराता।।
तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पता।
खान पान का वैभव तुम बिन नहीं आता।।
शुभ गुण सुन्दर युक्ता क्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोंकू कोई नहीं पाता।।
श्री अहोई मां की आरती जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता।।
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