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गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019
मकर संक्रांति पर्व तिथि व मुहूर्त 2020
भारत एक धर्म निरपेक्ष और सांस्कृतिक विविधताओं वाला देश है| जिसमें अनेक पर्व मनाए जाते हैं, व्रत उपवास रखे जाते हैं| यही कारण है कि भारत में पूरे साल हर्षोल्लास का वातावरण बना रहता है| इन्हीं में एक पर्व है मकर संक्रांति| यह हिन्दू धर्म का प्रमुख पर्व है| ज्योतिष के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है| सूर्य के एक राशि से दूसरी में प्रवेश करने को संक्रांति कहते हैं| दरसल मकर संक्रांति में 'मकर' शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि 'संक्रांति' का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है| चूंकि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इस समय को 'मकर संक्रांति' कहा जाता है| मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है| इस दिन गंगा स्नान कर व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्त्व है|
मकर संक्रांति पर्व का महत्त्व व मान्यताएं -
शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायन को नकारात्मकता तथा उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है| इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक कर्मों का विशेष महत्व है| ऐसी धारणा है कि इस दिन किया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है| इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है| जैसा कि निम्न श्लोक से स्पष्ट होता है-
माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम।
स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥
मकर संक्रांति से जुड़ी कई प्रचलित पौराणिक कथाएं हैं| ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भानु अपने पुत्र शनिदेव से मिलने उनके लोक जाते हैं| शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं| इसलिए इस दिन को मकर सक्रांति के नाम से जाना जाता है|
यह भी माना जाता है मकर संक्रांति के ही दिन भागीरथ के पीछे पीछे माँ गंगा मुनि कपिल के आश्रम से होकर सागर में मिली थीं| अन्य मान्यता है कि माँ गंगा को धरती पर लाने वाले भागीरथ ने अपने पूर्वजों का इस दिन तर्पण किया था| मान्यता यह भी है कि तीरों की सैय्या पर लेटे हुए पितामह भीष्म ने प्राण त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था| यह विश्वास किया जाता है कि इस अवधि में देहत्याग करने वाला व्यक्ति जन्म मरण के चक्र से पूर्णत: मुक्त हो जाता है|
मकर संक्रांति कहाँ - कहाँ और किस रूप में मनाई जाती है -
जैसी विविधता इस पर्व को मानाने में है वैसी किसी और पर्व में नहीं| त्यौहार के नाम, महत्त्व और मनाने के तरीके प्रदेश और भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदल जाते हैं| दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल, तो वहीं उत्तर भारत में इसे लोहड़ी, खिचड़ी, उत्तरायण, माघी, पतंगोत्सव आदि के नाम से जाना जाता है मध्यभारत में इसे संक्रांति कहा जाता है|
मकर संक्रांति के विशेष पकवान -
शीत ऋतु में वातावरण का तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारियां जल्दी घात करती हैं| इसलिए इस दिन गुड़ और तिल से बने मिष्ठान्न या पकवान बनाये, खाये और बांटे जाते हैं| इन पकवानों में गर्मी पैदा करने वाले तत्वों के साथ ही शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी मौजूद होते हैं| इसलिए उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है तथा गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक आदि का प्रसाद बांटा जाता है|
मकर संक्रांति 2020
15 जनवरी
संक्रांति काल - 07:19 बजे (15 जनवरी 2020)
पुण्यकाल - 07:19 से 12:31 बजे तक
महापुण्य काल - 07:19 से 09:03 बजे तक
संक्रांति स्नान - प्रात:काल, 15 जनवरी 2020
सोमवार, 7 जनवरी 2019
मकर संक्रांति के उपाय
मकर संक्रांति के उपाय
यह भी पढ़े - मकर संक्रांति पर सूर्य का गोचर बदल जाएगी इन राशियों की किस्मत
उपाय – 1
मकर संक्रांति की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कामों से निपट कर सूर्य को अर्घ्य दें। अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जाप करें।
मंत्र – ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्
कम से कम 5 माला जाप अवश्य करें। इस प्रकार मंत्र जाप करने से जीवन की हर परेशानी दूर हो जाएगी। यदि इस मंत्र का जप प्रत्येक रविवार को किया जाए तो और भी जल्दी लाभ होता है।
उपाय – 2
मकर संक्रांति को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें। पानी में कुंकुम तथा लाल रंग के फूल भी मिलाएं तो और भी शुभ रहेगा। अर्घ्य देते समय ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते रहें। इस प्रकार सूर्य को अर्घ्य देने से मन की हर इच्छा पूरी हो सकती है।
मकर संक्रांति को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें। पानी में कुंकुम तथा लाल रंग के फूल भी मिलाएं तो और भी शुभ रहेगा। अर्घ्य देते समय ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते रहें। इस प्रकार सूर्य को अर्घ्य देने से मन की हर इच्छा पूरी हो सकती है।
उपाय – 3
सूर्य के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए मकर संक्रांति पर सूर्य यंत्र की स्थापना कर के पूजा करनी चाहिए। इससे दोष कम होते हैं और विशेष लाभ भी मिलता है। सूर्य यंत्र की स्थापना इस प्रकार करें-
स्थापना विधि – मकर संक्रांति की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सूर्यदेव को प्रणाम करें। इसके बाद सूर्य यंत्र को गंगाजल व गाय के दूध से पवित्र करें। अब इस यंत्र की पूजा करने के बाद सूर्य मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र- ऊं घृणि सूर्याय नम:
जाप करने के बाद इस यंत्र को अपने पूजा स्थान पर करें। इस यंत्र की पूजा से शीघ्र ही सूर्य संबंधी होने वाली समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।
उपाय – 4
मकर संक्रांति पर गुड़ एवं कच्चे चावल बहते हुए जल में प्रवाहित करना शुभ रहता है। अगर सूर्यदेव को प्रसन्न करना हो तो पके हुए चावल में गुड़ और दूध मिलाकर खाना चाहिए। ये उपाय करने से भी सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं।
उपाय – 5
मकर संक्रांति पर दान करने का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए दान का पुण्य सौ गुना होकर प्राप्त होता है। अगर आप चाहते हैं कि भाग्य आपका साथ दे तो इस दिन कंबल, गर्म वस्त्र, घी, दाल-चावल की कच्ची खिचड़ी आदि का दान करें। गरीबों को भोजन करवाएं तो और भी जल्दी आपकी मनोकामना पूरी होगी।
उपाय – 6
ज्योतिष के अनुसार, तांबा सूर्य की धातु है। मकर संक्रांति पर तांबे का सिक्का या तांबे का चौकोर टुकड़ा बहते जल में प्रवाहित करने से कुंडली में स्थित सूर्य दोष कम होता है। इसके साथ-साथ लाल कपड़े में गेहूं व गुड़ बांधकर दान देने से भी व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है।
उपाय – 7
मकर संक्रांति की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद पूर्व दिशा में मुख करके कुश के आसन पर बैठें। अपने सामने बाजोट (पटिए) पर सफेद वस्त्र बिछाएं और उसके ऊपर सूर्यदेव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद सूर्यदेव की पंचोपचार पूजा करें और गुड़ का भोग लगाएं। पूजा में लाल फूल का उपयोग अवश्य करें। इसके बाद लाल चंदन की माला से नीचे लिखे मंत्र का जाप करें
मंत्र- ऊं भास्कराय नम:
कम से कम 5 माला जाप अवश्य करें
मकर संक्रांति पर सूर्य का गोचर बदल जाएगी इन राशियों की किस्मत
मकर संक्रांति पर सूर्य का गोचर बदल जाएगी इन राशियों की किस्मत
मकर संक्रांति यानि 15 जनवरी को सूर्य का मकर राशि में गोचर होने जा रहा है। सूर्य का 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश रात्रि 8 बजकर 8 मिनट पर होगा। सूर्य मकर राशि में 15 फरवरी दोपहर 3 बजकर 02 मिनट तक रहेंगे।
ज्योतिष के अनुसार सूर्य के मकर राशि में गोचर से 15 जनवरी के बाद कुछ राशियों की किस्मत में बदलाब होगा। इस बार मकर संक्रांति पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो 15 जनवरी तक रहेगा।
जानिए सूर्य का मकर में प्रवेश से आपकी राशि के लिए क्या खास बदलाव लाएगा
मेष
मेष राशि के लिए यह गोचर दशम भाव में होगा जिसके परिणामस्वरूप जातकों को सम्मान की प्राप्ति संभव है। आपको अपने ऑफिस या कार्यक्षेत्र में उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है लेकिन ध्यान रखें माता-पिता के साथ थोड़ा विवाद हो सकता है। नौकरी में पदोन्नति भी संभव है।
वृषभ
वृष राशि की कुंडली में यह गोचर नौवें भाव में होने जा रहा है, जो जातक के सुख को प्रभावित करता है। यह गोचर आपके लिए समृद्धि और संपन्नता लेकर आ रहा है, जो आपको मानसिक रूप से संतुष्ट करने वाला है। अगर आप नया वाहन लेने का मन बना रहे हैं तो यह समय आपके लिए उत्तम है। किसे को धोखा देने या झूठ बोलने का विचार भी त्याग दें।
मिथुन
अगर आपकी कुंडली मिथुन राशि की है तो आपके लिए यह गोचर अष्टम भाव में होने जा रहा है। इस परिवर्तन में वजह से आपका पराक्रम भंग हो सकता है और साथ ही यह मुमकिन है कि भाई-बहनों के साथ कुछ मनमुटाव की स्थिति आ जाए। दांपत्य जीवन में थोड़ी कड़वाहट घुल सकती है।
कर्क
कर्क राशि के जातकों की बात करें तो उनके लिए यह गोचर सप्तम भाव में होने जा रहा है। उनके लिए यह गोचर विवाहित जीवन के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता। साथ ही साथ सांझेदारों की वजह से हानि भी हो सकती है। जीवन साथी के स्वास्थ्य की समस्या उत्पन्न हो सकती है, अपना और उनका ध्यान रखें।
सिंह
सिंह राशि के जातकों के लिए यह गिचर छठे भाव में होने जा रहा है, जो किसी भी स्थिति में शुभ नहीं है। अगर किसी विपरीत ग्रह जैसे शनि, राहु की दशा चल रही है तो आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। आपको मानसिक परेशानियां झेलनी पड़ सकती है और साथ ही संतान की ओर से भी कुछ खटपट रह सकती है।
कन्या
अगर आपकी कुंडली कन्या राशि की है तो इस समय आपको सभी कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। शिक्षा और प्रतियोगिता जैसे क्षेत्रों में सफलता के पूर्ण योग बने हुए हैं, आप जिन कार्यों को अपने हाथ में लेंगे, वे सभी समय पर पूर्ण हो जाएंगे। समाज के प्रतिष्ठित लोगों के साथ आपके अच्छे संबंध बनेंगे।
तुला
यह गोचर चौथे भाव में होगा, जो शुभ नहीं है। आपके परिवार की स्त्रियां बीमार रह सकती है, जिसकी वजह से आप पारिवारिक सुख में कमी महसूस करेंगे। अगर आप कृषि से संबंधित कार्य में संलिप्त हैं तो आपको ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। घर में कलेह-क्लेश रह सकता है।
वृश्चिक
आपके लिए यह गोचर अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रहा है। यह गोचर आपको रोग और कर्जों से मिक्ति दिलाएगा। समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बनेगी। इसके अलावे धन लाभ के भी शुभ स्थिति बन रही है। इस दौरान आपके अंदर पराक्रम भाव मजबूत होगा।
धनु
आपके लिए लिए यह गोचर कुछ अच्छा साबित नहीं होगा। इस गोचर के दौरान आप किसी बहुमूल्य चीज को खो सकते हैं। साथ ही आपको शारीरिक कष्ट भी सहने पर सकते हैं। इस बीच आपक मन अशांत रह सकता है। खुद पर नियंत्रण करने से कुछ हद तक समस्या का समाधान होगा।
मकर
सूर्य का गोचर मकर राशि में अष्टमेश होकर आ रहे हैं। परिणामस्वरूप आपको बिना उद्देश्य के कई यात्राएं करनी पड़ सकती है। यदि कुण्डली के सप्तमेश भाव में दोष रहने पर आपके वैवाहिक जीवन में काफी उतार-चढ़ाव होगा। गोचर की अवधि में आपको आंख और मुंह से संबंधित समस्या बनी रह सकती है।
कुंभ
सूर्य का गोचर आपके लिए अचानक धन हानि की संभावनाएं लेकर आएगा। नए कार्य या व्यापर में परेशानियां आ सकती है। यह परेशानी आपके लिए बहुत दिनों तक नहीं रहेगी। वाद-विवाद में फंसने की संभावना बन रही है। कोर्ट-कचहरी से दूर रहें।
शुक्रवार, 4 जनवरी 2019
मकर संक्रांति 2019 शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति 2019 शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति, हिन्दुओं के प्रमुख पर्वों में से एक है जिसे प्रत्येक वर्ष जनवरी माह की 14 या 15 तारीख को मनाया जाता है। सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इसी स्थिति को संक्रांति कहा जाता है।
इस प्रकार सूर्य 12 महीनों में 12 राशियों में भ्रमण करता है जिसमे सबसे अधिक महत्व मकर संक्रांति का है। क्योंकि इस दिन से सूर्य दक्षिणायन से निकलकर उत्तरायण में आ जाता है।
मकर संक्रांति पर्व
हिन्दू धर्म मे मकर संक्रांति को एक पर्व के रूप में मनाया जाता है। जिसकी गणना सोलर कैलेंडर के आधार पर होती है जबकि अन्य सभी त्योहारों की गणना चंद्र कैलेंडर के आधार पर होती है।
मकर संक्रांति का महत्व
सूर्य कब दक्षिणायन में होता है तो उस अवधि को देवताओं की रात्रि कहा जाता है जबकि उत्तरायण के छः महीनों को देवताओं का दिन कहा जाता है। महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति को ही चुना था।
शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन गंगा जी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। इसी कारण मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और स्नान-दान का खास महत्व होता है।
मकर संक्रांति के दिन के बाद ही मौसम में परिवर्तन होने लगता है, इसलिए इस दिन के बाद रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। मकर संक्रांति के दिन दान, पुण्य, जप और धार्मिक अनुष्ठान करने का खास महत्व होता है। इस दिन गुड़, चावल और तिल का दान करना बहुत श्रेष्ठ माना जाता है।
मकर संक्रांति के दिन भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। और साथ ही गुड़, तिल, रेवड़ी, गजक आदि का प्रसाद भी बांटा जाता है। इस दिन खाये जाने वाले व्यंजनों में तिलों का प्रयोग किया जाता है। मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू, तिल पट्टी, तिलकुट खाने का खास महत्व होता है।
मकर संक्रांति 2019 मुहूर्त
2019 में मकर संक्रांति 15 जनवरी 2018, मंगलवार को है।
मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त
पुण्य काल मुहूर्त = सुबह 07:15 से 12:30 तक।
अवधि = 5 घंटे 14 मिनट
अवधि = 5 घंटे 14 मिनट
संक्रांति समय = 19:44 (14 जनवरी को)
महापुण्य काल मुहूर्त = सुबह 07:15 से 09:15 तक।
अवधि = 2 घंटे
अवधि = 2 घंटे
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