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रविवार, 2 जून 2019

सोमवती अमावस्या व्रत 2019- पूजा विधि, महत्व, उपाय और व्रत कथा

सोमवती अमावस्या व्रत 2019- पूजा विधि, महत्व, उपाय और व्रत कथा

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सोमवती अमावस्या पर व्रत रखने का अधिक महत्व है. सुबह उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण कर मां तुलसी की पूजा करनी करें. इसके बाद अपनी इच्छानुसार दान पुण्य करें. गरीबों को भोजन का दान करने से ज्यादा पुण्य मिलेगा. सोमवती अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहते हैं, आप पूरे दिन मौन व्रत धारण कर भी आराधना कर सकते हैं.

सोमवती अमावस्या का महत्व-

हिंदू मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का दिन काफी शुभ होता है. इस दिन व्रत-उपवास रखने से जीवन में आए अशुभ योग दूर होते हैं और घर-परिवार में सुख समृद्धि आती है. इस दिन महिलाएं व्रत और उपवास रखती हैं और पीपल के पेड़ के साथ ही तुलसी के पौधे की पूजा करती हैं. हिंदू धार्मिक कथाओं में अक्सर अमावस्या की तिथि को अशुभ माना जाता है लेकिन साल में तीन बार आने वाली सोमवती अमावस्या को शुभ माना जाता है. कुंभ मेले में भी एक दिन का स्नान मौनी अमावस्या यानी सोमवती अमावस्या का होता है. हालांकि शुभ दिन होने के बावजूद इस दिन कोई शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए.


सोमवती अमावस्या के उपाय

– सोमवती अमावस्या के दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है।
– इसके बाद क्षमता के अनुसार दान किया जाता है।
– सोमवती अमावस्या के दिन स्नान और दान का विशेष महत्त्व है।
– इस दिन मौन भी रखते हैं, इस कारण इसे मौनी अमावस्या भी कहा जाता है।
– माना जाता है कि सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहने के साथ ही स्नान और दान करने से  हजार गायों के दान करने के समान फल मिलता है।

सोमवती अमावस्या व्रत कथा

सोमवती अमावस्या की पौराणिक कथा के मुताबिक एक व्यक्ति के सात बेटे और एक बेटी थी। उसने अपने सभी बेटों की शादी कर दी लेकिन, बेटी की शादी नहीं हुई। एक भिक्षु रोज उनके घर भिक्षा मांगने अाते थे। वह उस व्यक्ति की बहूओ को सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद तो देता था लेकिन उसने उसकी बेटी को शादी का आशीर्वाद कभी नहीं दिया। बेटी ने अपनी मां से यह बात कही तो मां ने इस बारे में भिक्षु से पूछा, लेकिन वह बिना कुछ कहे वहां से चला गया। इसके बाद लड़की की मां ने एक पंडित से अपनी बेटी की कुंडली दिखाई। पंडित ने कहा कि लड़की के भाग्य में विधवा बनना लिखा है। मां ने परेशान होकर उपाय पूछा तो उसने कहा कि लड़की सिंघल द्वीप जाकर वहां रहने वाली एक धोबिन से सिंदूर लेकर माथे पर लगाकर सोमवती अमावस्या का उपवास करे तो यह अशुभ योग दूर हो सकता है। इसके बाद मां के कहने पर छोटा बेटा अपनी बहन के साथ सिंघल द्वीप के लिए रवाना हो गया। रास्ते में समुद्र देख दोनों चिंतित होकर एक पेड़ के नीचे बैठ गए। उस पेड़ पर एक गिद्ध का घोंसला था। मादा गिद्ध जब भी बच्चे को जन्म देती थी, एक सांप उसे खा जाता था। उस दिन नर और मादा गिद्ध बाहर थे और बच्चे घोसले में अकेले थे। इस बीच सांप अाया तो गिद्ध के बच्चे चिल्लाने लगे। यह देख पेड़ के नीचे बैठी साहूकार की बेटी ने सांप को मार डाला। जब गिद्ध और उसकी पत्नी लौटे, तो अपने बच्चों को जीवित देखकर बहुत खुश हुए और लड़की को धोबिन के घर जाने में मदद की। लड़की ने कई महीनों तक चुपचाप धोबिन महिला की सेवा की। लड़की की सेवा से खुश होकर धोबिन ने लड़की के माथे पर सिंदूर लगाया। इसके बाद रास्ते में उसने एक पीपल के पेड़ के चारों ओर घूमकर परिक्रमा की और पानी पिया। उसने पीपल के पेड़ की पूजा की और सोमवती अमावस्या का उपवास रखा। इस प्रकार उसके अशुभ योग का निवारण हो गया।

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

सोमवती अमावस्या पर बन रहा है दुर्लभ संयोग जानिये शुभ मुहूर्त महत्त्व और उपाय

सोमवती अमावस्या पर बन रहा है दुर्लभ संयोग जानिये शुभ मुहूर्त महत्त्व और उपाय 



सोमवार को पड़ रही मौनी अमावस्या कई संकटों से मुक्ती दिला सकती है। इस अमावस्या पर यदि मौन व्रत रखा जाए तो शीघ्र विवाह निश्चित है। तिल, दूध और तिल से बनी मिठाइयों का दान दरिद्रता मिटाने वाला है। सिद्धि योग पर प्रभाव जगत के मानव मात्र पर पड़ेगा। इस बार यह अमावस्या सोमवार को है तो इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाएगा।
इस बार अमावस्या चार फरवरी को है। वहीं अमावस्या तिथि तीन फरवरी की रात 11 बजकर 50 मिनट से ही प्रारंभ हो जाएगी जो कि पांच फरवरी को रात 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय काल चार फरवरी को होगा इसलिए स्नान दान करना चार फरवरी को ही शुभ होगा। माघ मास समूचा ही सबसे पवित्र माघ है। यह महीना शुरू हुए लगभग दस दिन को चुके हैं। आने वाली एकादशी कृष्ण पक्ष की पंचस्नानी शुरू हो जाएगी। इसके बाद मौनी अमावस्या के दिन प्रयाग अर्द्धकुंभ का स्नान भी पड़ रहा है, अत: देश की सभी नदियों पर समान फल प्राप्त होगा।
प्रात:काल मौन रहकर संकल्प स्नान करने और सूर्य को दूध, तिल से अर्घ्य देना विशेष लाभकारी रहेगा। चार फरवरी को मौनी अमावस्या का पूर्ण काल प्रात: सूर्योदय से लेकर सायंकाल सूर्यास्त तक है। इस दिन अन्न, वस्त्र और स्वर्ण का दान अक्षय फल देना वाला है।
मौनी अमावस्या के दिन पितृ तर्पण और पितृ श्राद्ध भी अक्षय देते हैं। चंद्रमा का नक्षत्र श्रवण है और चंद्रमा का दिन सोमवार है। इस बार का संयोग यह है कि मौनी अमावस्या के दिन भगवान भास्कर भी चंद्रमा के नक्षत्र में प्रवेश कर सिद्धि योग बनाएंगे।
जो लोग उम्र भर गरीबी से त्रस्त रहे हो, संतान प्राप्ति न होती हो, व्यवसाय शुरू होते ही ठप्प पड़ जाता हो, उनके लिए मौनी अमावस्या का पर्व विशेष फल लेकर आ रहा है। ऐसे पीड़ित लोग चांदी का छोटा सा पीपल बनाकर दान करेंगे तो सारे दुर्योगों का विनाश हो जाएगा।

सोमवती अमावस्या पूजा विधि एवं कथा,महत्त्व,पूजन सामग्री,नियम और सावधानियां

सोमवती अमावस्या पूजा विधि एवं कथा,महत्त्व,पूजन सामग्री,नियम और सावधानियां



सोमवती अमावस्या का महत्त्व:-

हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे, सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस वर्ष सोमवती अमावस्या ०४ फरवरी २०१९ सोमवार, ०३ जून २०१९ सोमवार और २८ अक्टूबर २०१९ सोमवार को है। इस दिन के व्रत का महत्त्व हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी दिया गया है। विवाहित स्त्री अपने पति की लम्बी आयु के लिये इस दिन व्रत रखती है। यह पितृ दोष के निवारण में भी सहायक है। इस दिन को गंगा स्नान का भी बड़ा महत्व है। जो मनुष्य गंगा स्नान को नहीं जा सकते, वे अपने घर में हीं पानी में गंगा जल मिला कर तीर्थों का आह्वान करते हुए स्नान करें। इस दिन स्नान दान का विशेष महत्व है। इस दिन मौन रहकर स्नान करने से सहस्त्र गौ दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। कुरुक्षेत्र के ब्रह्मा सरोवर में स्नान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
• सोमवती अमावस्या के दिन भगवान सूर्य को जल देना चाहिए, इससे गरीबी और दरिद्रता दूर होती है ।
• 108 बार पीपल की परिक्रमा करें।
• इसके अलावा मंत्र जाप, सिद्धि साधना एवं दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।
• इस दिन पितरों के तर्पण का कार्य भी किया जाता है ।
• सोमवार को भगवान शिव का वार है, अत: सोमवती अमावस्या को शिव एवं हनुमान जी की पूजा करने से कठिनाईयाँ दूर होती है
• इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा व पेड़ की जड़ में दीपक जलाना चाहिए तथा शनि देव की भी पूजा करनी चाहिये।
सोमवती अमावस्या पूजन सामग्री
 पुष्प • माला • अक्षत • चंदन • कलश • दीपक • घी • धूप • रोली • भोग • धागा • सिंदूर
• चूड़ी / बिंदी / सुपारी / पान के पत्ते / मूंगफली – 108 की संख्या में (जिससे परिक्रमा आसानी से पूरी हो जाये)

सोमवती अमावस्या व्रत विधि

सोमवती अमावस्या का व्रत विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी आयु के लिये करती है । इसे अश्वत्थ (पीपल) प्रदक्षिणा व्रत भी कहते हैं। इस दिन प्रात: काल उठकर नित्य कर्म तथा स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन लें। अब सभी पूजन सामग्री लेकर पीपल के वृक्ष के पास जायें। पीपल की जड़ में लक्ष्मी नारायण की स्थापना करके दूध /जल अर्पित करें। पीपल की जड़ में सूत लपेट दें। भगवान का ध्यान करके पुष्प, अक्षत, चन्दन, भोग, धूप इत्यादि अर्पण करें। फिर प्रेमपूर्वक हाथ जोड़कर भगवान की प्रार्थना करें। अब पेड़ के चारों ओर “ॐ श्री वासुदेवाय नम:” बोलते हुए 108 बार परिक्रमा करें। इसके बाद कथा सुनें अथवा सुनाये। सामर्थ्यानुसार दान दें। ऐसा करने से भगवान पुत्र, पौत्र, धन, धान्य तथा सभी मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। इस दिन मूली और रूई का स्पर्श ना करें।


सोमवती अमावस्या कथा



एक साहूकार के सात बेटे और सात ही बहुओं के साथ एक बेटी भी थी. साहूकार के घर रोज एक जोगी आता था जिसे साहूकार की बहू भिक्षा देती थी. उस जोगी को जब साहूकार की बेटी भिक्षा देने आती तो वह उससे भिक्षा नहीं लेता था और कहता कि तेरे भाग्य में सुहाग की जगह दुहाग लिखा है. लड़की को उस जोगी की यह बात बहुत बुरी लगती और एक दिन वह अपनी माँ से रोते-रोते जोगी की बात बताती है. सारी बात सुनकर माँ कहती है कि कल जब जोगी आएगा तब मैं सुनती हूँ कि वह क्या कहता है और क्यूँ कहता है?

अगले दिन फिर जोगी आता है तो साहूकारनी छिपकर बैठ जाती है और लड़की को भिक्षा देने भेजती है. जोगी उससे भिक्षा नहीं लेता और फिर वही बात दोहराता है कि तेरे भाग्य में सुहाग की बजाय दुहाग लिखा है. लड़की की माँ बाहर निकल कर आती है और जोगी से कहती है कि एक तो हम तुझे भिक्षा देते हैं और तू हमें गाली देता है! जोगी कहता है कि मैं गाली नहीं दे रहा हूँ जो बात सच है वही कह रहा हूँ. इसके भाग्य में जो लिखा है मैं वही सच आपको बता रहा हूँ.

सारी बातें सुनने पर लड़की की माँ कहती है कि जब तुझे सारी बात पता है तो इससे बचने का उपाय भी पता होगा वह बता? जोगी कहता है कि सात समंदर पार एक धोबन रहती है जिसका नाम सोना है. वह सोमवती अमावस्या का व्रत करती है, अगर वह आकर इसे फल दे दे तब ही इसका दुहाग टल सकता है अन्यथा विवाह के समय सर्प काटने से इसके पति की मृत्यु हो जाएगी. सारी बात सुनकर माँ रोने लगी और सोना धोबिन की तलाश में निकल गई.

चलते-चलते रास्ते में तेज धूप पड़ रही थी जिससे बचने के लिए वह एक पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ गई. उसी वृक्ष पर एक गरुड़ के बच्चे अपने घोसलें में थे. एक साँप आया और गरुड़ के बच्चों को खाने के लिए लपका लेकिन साहूकारनी ने उस साँप को मारकर बच्चों की रक्षा की. कुछ देर बाद गरुड़नी आई और सब जगह खून देखकर साहूकारनी को चोंच से मारने लगी. साहूकारनी बोली कि एक तो मैंने तेरे बच्चों को साँप से बचाया और तू मुझे ही मार रही है. सारी बातें जानने पर गरुंड़नी बोली कि तूने मेरे बच्चों की रक्षा की है इसलिए माँग जो चाहती है.

साहूकारनी गरुड़नी से कहती है कि मुझे सात समंदर पार सोना धोबिन के यहाँ छोड़ दो और गरुड़नी ने वैसा ही किया. साहूकारनी वहाँ पहुंच तो गई लेकिन सोचने लगी कि इसे कैसे मनाऊं? सोना धोबिन की भी सात बहुएँ थी लेकिन घर के काम को करने के लिए सदा आपस में ही लड़ती-झगड़ती रहती थी. रात को जब सब सो जाते तो साहूकारनी आती और चुपके से सारा काम कर उजाला होने से पहले चली भी जाती. सारी बहुएँ भी आपस में यही सोचती कि कौन सी बहू है जो सारा काम कर देती है लेकिन एक-दूसरे से पूछने की हिम्मत किसी की भी नहीं होती.

काम करने की बात सोना धोबिन ने भी देखी कि आजकल बहुएँ लड़ती भी नहीं है और काम भी सारा हो जाता है. सोना धोबिन ने सारी बहुओं को बुलाया और पूछा कि आजकल तुम लड़ती भी नहीं हो और घर का सारा काम कौन करता है? बहुएँ सास से झूठ कहती हैं कि लड़ाई करने से क्या फायदा इसलिए हम मिलकर काम कर लेती हैं. सोना धोबिन को अपनी बहुओं की बात पर विश्वास नहीं होता और वह रात में जागकर वह स्वयं सच देखना चाहती है कि कौन काम करता है!

रात होने पर सोना धोबिन छिपकर बैठ जाती है कि देखूँ कौन सी बहू काम करती है. रात हुई तो वह देखती है कि एक औरत चुपके से घर में घुस रही है. वह देखती है कि उसने घर का सारा काम कर दिया है और जाने की तैयारी में है. जैसे ही साहूकारनी जाने लगती है तो सोना धोबिन उसे रोकती है और पूछती है कि तुम कौन हो़? और क्या चाहती हो? साहूकारनी कहती है कि पहले तुम वचन भरो तब बताऊँगी. वह वचन भरती है तब साहूकारनी कहती है कि मेरी बेटी के भाग्य में दुहाग लिखा है लेकिन तुम सोमवती अमावस्या करती हो तो मेरे साथ चलकर उसे सुहाग दे दो.

सोना धोबिन वचन से बँधी थी तो वह साहूकारनी के साथ चलने को तैयार हो जाती है. जाते हुए सोना धोबिन अपने बेटों व बहुओं से कहती है कि मैं इस औरत के साथ इसकी बेटी को सुहाग देने जा रही हूँ लेकिन अगर मेरे पीछे से तुम्हारे पिताजी मर जाएँ तो उन्हें तेल के कूपे में डालकर रख देना. धोबिन साहूकारनी के घर पहुँच जाती है. साहूकरनी अपनी बेटी का विवाह करती है तो फेरों के समय सोना धोबिन कच्चा करवा, दूध तथा तार लेकर बैठ जाती है. कुछ समय बाद साँप आया और दूल्हे को डसने लगा तो सोना धोबिन ने करवा आगे कर तार से साँप को बाँध दिया और साँप मर गया. अब सोना धोबिन ने लड़की को सुहाग दिया और कहा कि जितनी अमावस्याएँ मैने की हैं उन सभी का फल साहूकार की इस लड़की को मिलेगा. अब आगे जो अमावस्याएँ मैं करुँगी उनका फल मेरे पति व बेटों को मिलेगा.

सभी लोग सोमवती अमावस्या की जय-जयकार करने लगे. सोना धोबिन अपने घर वापिस जाने को तैयार हुई तो साहूकारनी ने कहा कि तुमने मेरे जमाई को जीवनदान दिया है इसलिए तुम जो चाहो माँग लो. सोना धोबिन बोली कि मुझे कुछ नहीं चाहिए और वह चली गई. रास्ते में चलते हुए फिर से सोमवती अमावस्या आ गई उसने पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर कहानी कही, व्रत रखा और पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा की.

पीपल के पेड़ की पूजा के बाद वह घर जाती है तो देखती है कि उसका पति मरा पड़ा है. अब रास्ते में जो सोमवती अमावस्या उसने की थी उसका फल अपने पति को दे दिया जिसके प्रभाव से वह पुन: जीवित हो गया. सब कहने लगे कि तूने ऎसा क्या किया जो तेरा पति जिन्दा हो गया? वह कहती है कि मैंने तो ऎसा कुछ नहीं किया है बस रास्ते में सोमवती अमावस्या आ गई थी जिसका मैने व्रत किया, कहानी कही और पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा की.

अब सारी नगरी में ढिंढोरा पिटवा दिया गया कि हर कोई सोमवती अमावस्या करेगा, पूजा करेगा, व्रत रखेगा, कहानी कहेगा और पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करेगा. हे सोमवती अमावस्या ! जैसा आपने साहूकार की बेटी का सुहाग दिया वैसे ही सबका देना.

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