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गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019
जानें क्यों प्रिय है विष्णु भगवान् को पीला रंग
जानें क्यों प्रिय है विष्णु भगवान् को पीला रंग
सुख, समृद्धि और लाभ के देव भगवान विष्णु को शांत मन और सात्विक वातावरण बहुत पसंद है. इसलिए इन्हें संतों का देव भी माना गया है. वैसे भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है. जानते हैं इसकी वजह...
गुरुवार का दिन भगवान बृहस्पति की पूजा के लिए शुभ माना गया है और इसी दिन साईं बाबा की भी पूजा की जाती है. शास्त्रों के अनुसार भगवान बृहस्पति साधु और संतों के देव माने गए हैं और इसी तरह पीला रंग संपन्नता का प्रतीक भी है. यही वजह है कि पीला रंग इस दिन को समर्पित किया गया है.
आज के दिन पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और धन संपत्त्िा का वरदान देते हैं. भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन पीले वस्त्र धारण करने चाहिए और पीली वस्तुओं का दान किया जाता है. वहीं दूसरी तरफ आज कुछ चीजों को करने से परहेज करना भी बहुत जरूरी है.
इसलिए भगवान विष्णु को कैसे करें प्रसन्न और क्या न करें इस दिन जानें...
- सुबह उठकर नहाने के बाद पीले रंग के कपड़े पहनें.
- पूजा में भोग लगाने के लिए गुड़ और चने की दाल को एक साथ मिला कर प्रसाद बनाएं.
- इस प्रसाद को आप भगवान को अर्पण कर पूजा करें. ऐसा करने भगवान विष्णु प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद आपके घर पर सदा बनाए रखते हैं.
- गुरुवार की पूजा विधि-विधान के अनुसार की जानी चाहिए और बृहस्पति देव के पूजन में पीले फूल, चने की दान, पीली मिठाई, पीले चावल आदि का उपयोग करना शुभ रहता है.
- आज के दिन केले के पेड़ का पूजन करना चाहिए और संभव हो तो इसके पास बैठकर ही बृहस्पति देव का पूजन और कथा पाठ करना चाहिए.
- अगर आज के दिन आप व्रत रख रहे हैं तो आपको केवल पीले फल ग्रहण करने चाहिए. आज के दिन पीली वस्तुओं का दान करने से मन को शांति और घर में समृद्धि का निवास रहता है.
- भगवान बृहस्पति देव की पूजा मात्र से आपके घर में गुरु का वास होता है.
- आज के दिन मन से सभी बुरे विचार त्याग कर भगवान के चरणों में अपने जीवन को अर्पण करना चाहिए.
- आज के दिन घर में पोछा नहीं लगना चाहिए और न ही कपड़े धोने या प्रेस करने को चाहिए.
- आज के दिन किसी को पैसे नहीं देने चाहिए.
- जो लोग गुरुवार का व्रत करें उन्हें नमक ग्रहण नहीं करना चाहिए और पीला भोजन करना चाहिए.
बृहस्पतिवार व्रत की विधि और कथा
बृहस्पतिवार व्रत की विधि और कथा
गुरुवार को भगवान बृहस्पति की पूजा का विधान है. इस पूजा से परिवार में सुख-शांति रहती है. जल्द विवाह के लिए भी गुरुवार का व्रत किया जाता है.
गुरुवार व्रत की विधि:
गुरुवार की पूजा विधि-विधान के अनुसार की जानी चाहिए. व्रत वाले दिन सुबह उठकर बृहस्पति देव का पूजन करना चाहिए. बृहस्पति देव का पूजन पीली वस्तुएं, पीले फूल, चने की दाल, मुनक्का, पीली मिठाई, पीले चावल और हल्दी चढ़ाकर किया जाता है. इस व्रत में केले के पेड़ की का पूजा की जाती है. कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्ध होकर मनोकामना पूर्ति के लिए बृहस्पतिदेव से प्रार्थना करनी चाहिए.
जल में हल्दी डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाएं. केले की जड़ में चने की दाल और मुनक्का चढ़ाएं साथ ही दीपक जलाकर पेड़ की आरती उतारें. दिन में एक समय ही भोजन करें. खाने में चने की दाल या पीली चीजें खाएं, नमक न खाएं, पीले वस्त्र पहनें, पीले फलों का इस्तेमाल करें. पूजन के बाद भगवान बृहस्पति की कथा सुननी चाहिए.
गुरुवार व्रत की कथा:
प्राचीन काल की बात है. किसी राज्य में एक बड़ा प्रतापी और दानी राजा राज करता था. वह प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखता एवं भूखे और गरीबों को दान देकर पुण्य प्राप्त करता था, परंतु यह बात उसकी रानी को अच्छी नहीं लगती थी. वह न तो व्रत करती थी, न ही किसी को एक भी पैसा दान में देती थी और राजा को भी ऐसा करने से मना करती थी.
एक समय की बात है, राजा शिकार खेलने के लिए वन चले गए थे. घर पर रानी और दासी थी. उसी समय गुरु बृहस्पतिदेव साधु का रूप धारण कर राजा के दरवाजे पर भिक्षा मांगने आए. साधु ने जब रानी से भिक्षा मांगी तो वह कहने लगी, हे साधु महाराज, मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गई हूं. आप कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे कि सारा धन नष्ट हो जाए और मैं आराम से रह सकूं.
बृहस्पतिदेव ने कहा, हे देवी, तुम बड़ी विचित्र हो, संतान और धन से कोई दुखी होता है. अगर अधिक धन है तो इसे शुभ कार्यों में लगाओ, कुंवारी कन्याओं का विवाह कराओ, विद्यालय और बाग-बगीचे का निर्माण कराओ, जिससे तुम्हारे दोनों लोक सुधरें. परंतु साधु की इन बातों से रानी को खुशी नहीं हुई. उसने कहा कि मुझे ऐसे धन की आवश्यकता नहीं है, जिसे मैं दान दूं और जिसे संभालने में मेरा सारा समय नष्ट हो जाए.
तब साधु ने कहा- यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो मैं जैसा तुम्हें बताता हूं तुम वैसा ही करना. गुरुवार के दिन तुम घर को गोबर से लीपना, अपने केशों को पीली मिटटी से धोना, केशों को धोते समय स्नान करना, राजा से हजामत बनाने को कहना, भोजन में मांस मदिरा खाना, कपड़ा धोबी के यहां धुलने डालना. इस प्रकार सात बृहस्पतिवार करने से तुम्हारा समस्त धन नष्ट हो जाएगा. इतना कहकर साधु रुपी बृहस्पतिदेव अंतर्ध्यान हो गए.
साधु के अनुसार कही बातों को पूरा करते हुए रानी को केवल तीन बृहस्पतिवार ही बीते थे कि उसकी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई. भोजन के लिए राजा का परिवार तरसने लगा. तब एक दिन राजा ने रानी से बोला कि हे रानी, तुम यहीं रहो, मैं दूसरे देश को जाता हूं, क्योंकि यहां पर सभी लोग मुझे जानते हैं. इसलिए मैं कोई छोटा कार्य नहीं कर सकता. ऐसा कहकर राजा परदेश चला गया. वहां वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता. इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा. इधर, राजा के परदेश जाते ही रानी और दासी दुखी रहने लगी.
एक बार जब रानी और दासी को सात दिन तक बिना भोजन के रहना पड़ा, तो रानी ने अपनी दासी से कहा- हे दासी, पास ही के नगर में मेरी बहन रहती है. वह बड़ी धनवान है. तू उसके पास जा और कुछ ले आ, ताकि थोड़ी-बहुत गुजर-बसर हो जाए. दासी रानी की बहन के पास गई.
उस दिन गुरुवार था और रानी की बहन उस समय बृहस्पतिवार व्रत की कथा सुन रही थी. दासी ने रानी की बहन को अपनी रानी का संदेश दिया, लेकिन रानी की बड़ी बहन ने कोई उत्तर नहीं दिया. जब दासी को रानी की बहन से कोई उत्तर नहीं मिला तो वह बहुत दुखी हुई और उसे क्रोध भी आया. दासी ने वापस आकर रानी को सारी बात बता दी. सुनकर रानी ने अपने भाग्य को कोसा. उधर, रानी की बहन ने सोचा कि मेरी बहन की दासी आई थी, परंतु मैं उससे नहीं बोली, इससे वह बहुत दुखी हुई होगी.
कथा सुनकर और पूजन समाप्त करके वह अपनी बहन के घर आई और कहने लगी- हे बहन, मैं बृहस्पतिवार का व्रत कर रही थी. तुम्हारी दासी मेरे घर आई थी परंतु जब तक कथा होती है, तब तक न तो उठते हैं और न ही बोलते हैं, इसलिए मैं नहीं बोली. कहो दासी क्यों गई थी.
रानी बोली- बहन, तुमसे क्या छिपाऊं, हमारे घर में खाने तक को अनाज नहीं था. ऐसा कहते-कहते रानी की आंखें भर आई. उसने दासी समेत पिछले सात दिनों से भूखे रहने तक की बात अपनी बहन को विस्तारपूर्वक सूना दी. रानी की बहन बोली- देखो बहन, भगवान बृहस्पतिदेव सबकी मनोकामना को पूर्ण करते हैं. देखो, शायद तुम्हारे घर में अनाज रखा हो.
पहले तो रानी को विश्वास नहीं हुआ पर बहन के आग्रह करने पर उसने अपनी दासी को अंदर भेजा तो उसे सचमुच अनाज से भरा एक घड़ा मिल गया. यह देखकर दासी को बड़ी हैरानी हुई. दासी रानी से कहने लगी- हे रानी, जब हमको भोजन नहीं मिलता तो हम व्रत ही तो करते हैं, इसलिए क्यों न इनसे व्रत और कथा की विधि पूछ ली जाए, ताकि हम भी व्रत कर सकें. तब रानी ने अपनी बहन से बृहस्पतिवार व्रत के बारे में पूछा.
उसकी बहन ने बताया, बृहस्पतिवार के व्रत में चने की दाल और मुनक्का से विष्णु भगवान का केले की जड़ में पूजन करें तथा दीपक जलाएं, व्रत कथा सुनें और पीला भोजन ही करें. इससे बृहस्पतिदेव प्रसन्न होते हैं. व्रत और पूजन विधि बताकर रानी की बहन अपने घर को लौट गई.
सात दिन के बाद जब गुरुवार आया, तो रानी और दासी ने व्रत रखा. घुड़साल में जाकर चना और गुड़ लेकर आईं. फिर उससे केले की जड़ तथा विष्णु भगवान का पूजन किया. अब पीला भोजन कहां से आए इस बात को लेकर दोनों बहुत दुखी थे. चूंकि उन्होंने व्रत रखा था इसलिए बृहस्पतिदेव उनसे प्रसन्न थे. इसलिए वे एक साधारण व्यक्ति का रूप धारण कर दो थालों में सुन्दर पीला भोजन दासी को दे गए. भोजन पाकर दासी प्रसन्न हुई और फिर रानी के साथ मिलकर भोजन ग्रहण किया.
उसके बाद वे सभी गुरुवार को व्रत और पूजन करने लगी. बृहस्पति भगवान की कृपा से उनके पास फिर से धन-संपत्ति आ गई, परंतु रानी फिर से पहले की तरह आलस्य करने लगी. तब दासी बोली- देखो रानी, तुम पहले भी इस प्रकार आलस्य करती थी, तुम्हें धन रखने में कष्ट होता था, इस कारण सभी धन नष्ट हो गया और अब जब भगवान बृहस्पति की कृपा से धन मिला है तो तुम्हें फिर से आलस्य होता है.
रानी को समझाते हुए दासी कहती है कि बड़ी मुसीबतों के बाद हमने यह धन पाया है, इसलिए हमें दान-पुण्य करना चाहिए, भूखे मनुष्यों को भोजन कराना चाहिए, और धन को शुभ कार्यों में खर्च करना चाहिए, जिससे तुम्हारे कुल का यश बढ़ेगा, स्वर्ग की प्राप्ति होगी और पित्र प्रसन्न होंगे. दासी की बात मानकर रानी अपना धन शुभ कार्यों में खर्च करने लगी, जिससे पूरे नगर में उसका यश फैलने लगा.
बृहस्पतिवार व्रत कथा के बाद श्रद्धा के साथ आरती की जानी चाहिए. इसके बाद प्रसाद बांटकर उसे ग्रहण करना चाहिए
बृहस्पतिवार के दिन जरूर करें ये 3 काम,आपकी तिजोरी हमेशा भरी रहेगी
बृहस्पतिवार के दिन जरूर करें ये 3 काम,आपकी तिजोरी हमेशा भरी रहेगी
हिंदू धर्म में बृहस्पतिवार को धन और समृद्धि का दिन माना जाता है। इस दिन को धार्मिक लिहाज से बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
गुरुवार के दिन सुख-समृद्धि के भगवान बृहस्पति की आराधना करने के कई तरीके धार्मिक किताबों में बताए गए हैं लेकिन कुछेक ऐसे अचूक तरीके हैं जिन्हें करने के बाद से आपकी कुंडली में मौजूद बृहस्पति मजबूत तो होगा ही साथ ही सारे बिगड़े काम बनने लगेंगे।
इसके लिए आपको विशेष प्रकार से 3 कार्यों को महत्ता देनी है-
1) गुरुवार के दिन ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्नान के समय 'ॐ बृ बृहस्पते नमः' का जाप भी करें। स्नान के बाद पीले रंग को वस्त्र धारण करें।
2) स्नान के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा व चित्र का सामने घी का दीया जलाएं। भगवान विष्णु को पीले रंग के फूलों के साथ तुलसी का एक छोटा सा पत्ता अर्पित करें।
3) अपने माथे पर हल्दी, चंदन या केसर का तिलक धारण करें।
माना जाता है कि भगवान बृहस्पति तो पीले रंग की चीजें बहुत पसंद हैं। इसलिए इस दिन ब्राह्मणों को पीले रंग की वस्तुएं जैस- चने की दाल, फल आदि करें।
गुरुवार के दिन इन उपायों से होगी हर तरह की परेशानी दूर
गुरुवार के दिन इन उपायों से होगी हर तरह की परेशानी दूर
भगवान विष्णु को बृहस्पति देव के नाम से भी जाना जाता है। इनकी पूजा के लिए गुरुवार का दिन है ।
इस दिन किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की समस्या हो और वह उस परेशानी में और भी जकड़ता जा रहा हो तो गुरुवार का दिन उसकी सभी समस्याओं के अंत के लिए एकदम सही है।
बृहस्पतिवार के दिन बृहस्पतेश्वर देव की पूजा में केलव आपको कुछ बातों का ध्यान रखना है औऱ यदि आप इस दिन बृहस्पति देव की पूजा करते हैं तो कुछ कार्यों में खोड़ा बहुत फेरबदल करना होगा।
इन थोड़े बहुत फेरबदल से कुछ ही समय में आपके जीवन की सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी और भगवान बृहस्पति की कृपा आपके घर-परिवार पर होगी।
गुरुवार के दिन भगवान वृहस्पति की तरह पीले रंग के पीले वस्त्र धारण करें, पूजा के समय में उन्हें पीले रंग के पुष्प चढ़ाएं।
यदि आप व्रत करते हैं तो एक समय किए जाने वाले भोजन में चने की दाल का होना आवश्यक है। लेकिन ध्यान रहे कि इस व्रत में आपको नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। भगवान बृहस्पति को पीले रंग का कपड़ा और चंदन चढ़ाना चाहिए।
दान के स्वरूप में आप चने की दाल, आम हल्दी, सोना आदि दान कर सकते हैं। इसके अलावा पूजा के पश्चात केले के पेड़ में जल अर्पित करें व संभव हो तो परिक्रमा भी कर सकते हैं।
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