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बुधवार, 20 जनवरी 2021

जानें बसंत पंचमी 2021 तिथि और सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त

 जानें बसंत पंचमी 2021 तिथि और सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त




पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व फरवरी माह में पड़ रहा है. बसंत पंचमी का संबंध ज्ञान और शिक्षा से है. हिंदू धर्म में सरस्वती को ज्ञान की देवी माना गया है. बसंत पंचमी का पर्व सरस्वती माता को सर्मिर्पत है. इस दिन शुभ मुहूर्त में सरस्वती पूजा करने से ज्ञान में वृद्धि होती है. शिक्षा और संगीत के क्षेत्र से जुड़े लोग इस पर्व का वर्षभर इंतजार करते हैं.

बसंत पंचमी का पर्व बेहद महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है. बसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. इस वर्ष बसंत पंचमी का पर्व कब है? जानते हैं.


बसंत पंचमी कब है?
पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्योहार इस वर्ष 16 फरवरी 2021 को मनाया जाएगा. इस दिन माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है. इस तिथि को बसंत पंचमी के नाम जाना जाता है.


बसंत पंचमी का महत्व
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी से ग्रीष्म (गर्मी) ऋतु के आगमन का आरंभ होता है. बसंत पंचमी से सर्दी के जाने का क्रम आरंभ हो जाता है. इस दिन सर्दी कम होने लगती है. बसंत के मौसम में प्रकृति नए रंग में नजर आने लगती है. फसल, पौधों और वृक्षों पर नए पत्ते, बाली और फूल खिलने लगते हैं. वातावरण को देखकर आनंद का भाव मन में आने लगता है. कवि, संगीत प्रेमी और लेखकों को यह पर्व बहुत प्रिय है.


बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं
पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त का योग भी बनता है. इस दिन शुभ कार्य करने के लिए किसी मुहूर्त को देखने की जरूरत नहीं पड़ती है. इस दिन को विद्या आरंभ करने के लिए भी उत्तम माना गया है.


बसंत पंचमी मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 16 फरवरी को सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर पंचमी तिथि आरंभ होगी. बसंत पंचमी का समापन 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर होगा.


बसंत पंचमी पूजा विधि
इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है. बसंत पंचमी के दिन सुबह सूर्य निकलने से पहले स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इस दिन विधि पूर्वक मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए. बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना गया है.


सरस्वती पूजा मंत्र
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा.

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

बसंत पंचमी पर्व कथा, सरस्वती पूजा,तिथि व मुहूर्त 2020

बसंत पंचमी 2020




बसंत पंचमी एक हिन्दू पर्व है| हिन्दू पंचांग के मुताबिक यह पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिन यानि पंचमी तिथि को मनाया जाता है| इस दिन माँ देवी सरस्वती की आराधना की जाती है| पर्व भारत के आलावा बांग्लादेश और नेपाल में बड़े उल्लास से मनाई जाती है| इस दिन महिलाएं पीले रंग का वस्त्र धारण करती हैं| भारत समेत नेपाल में छः ऋतुओं में सबसे लोकप्रिय ऋतु बसंत है| इस ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य मन को मोहित करता है| इस ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है, जिससे यह बसंत पंचमी का पर्व कहलाता है| शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है| बसंत पंचमी को श्रीपंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है| बसंत पंचमी के दिन को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं| ऋग्वेद में माता सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

अर्थात मां आप परम चेतना हो|देवी सरस्वती के रूप में आप हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हो| हम में जो आचार और मेधा है उसका आधार मां आप ही हो| इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है|

बसंत पंचमी कथा -
सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे|  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है| विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था| अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया| जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई| जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ| पवन चलने से सरसराहट होने लगी|  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा| सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है|

बसंत पंचमी का महत्त्व -
पंचमी बसंत का पौराणिक महत्त्व रामायण काल से जुड़ा हुआ है| जब मां सीता को रावण हर कर लंका ले जाता है तो भगवान श्री राम उन्हें खोजते हुए जिन स्थानों पर गए थे उनमें दंडकारण्य भी था| यहीं शबरी नामक भीलनी रहती थी| जब राम उसकी कुटिया में पधारे, तो वह सुध बुध खो बैठी और प्रेम वश चख चखकर मीठे बेर राम जी को खिलाने लगी| कहते हैं कि गुजरात के डांग जिले में वह स्थान आज भी है जहां शबरी मां का आश्रम था|  बसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी वहां पधारे थे| आज भी उस क्षेत्र के वनवासी एक शिला को पूजते हैं, जिसमें उनकी श्रध्दा है कि भगवान श्रीराम आकर यहीं बैठे थे| यहाँ शबरी माता का मंदिर भी है|

बसंत पंचमी का दिन हमें पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है| उन्होंने मोहम्मद ग़ोरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद ग़ोरी ने उन्हें नहीं छोड़ा| वह उन्हें अपने साथ अफगानिस्तान ले गया| जहां उसने उनकी आंखें फोड़ दीं| इसके बाद की घटना तो जग जाहिर है|  मोहम्मद ग़ोरी ने मृत्युदंड देने से पूर्व चौहान के शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा| इस अवसर का लाभ उठाकर कवि चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया|

चार बांस चौबीस गजअंगुल अष्ट प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान हैमत चूको चौहान 

पृथ्वीराज चौहान ने इस बार भूल नहीं की। उन्होंने चंदबरदाई के संकेत से अनुमान लगाकर जो बाण मारा, वह मोहम्मद ग़ोरी के सीने में जा धंसा| इसके बाद चंदबरदाई और पृथ्वीराज ने एक दूसरे के पेट में छुरा भोंककर आत्मबलिदान दे दिया| 1192 ई की यह घटना बसंत पंचमी के दिन ही घटी थी|

बसंत पंचमी  सरस्वती पूजा
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं|

बसंत पंचमी पर्व तिथि व मुहूर्त 2020

बसंत पंचमी 2020
29 जनवरी
बसंत पंचमी - 29 जनवरी 2020
पूजा मुहूर्त - 10:45 से 12:35 बजे तक
पंचमी तिथि का आरंभ - 10:45 बजे से (29 जनवरी 2020)
पंचमी तिथि समाप्त - 13:18 बजे (30 जनवरी 2020) तक

शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

इस बार गुप्त नवरात्रि के दौरान है वसंत पचंमी, जानिये विवाह के शुभ मुहूर्त

इस बार गुप्त नवरात्रि के दौरान है वसंत पचंमी, जानिये विवाह के शुभ मुहूर्त

इस बार गुप्त नवरात्रि के दौरान है वसंत पचंमी, जानिये विवाह के शुभ मुहूर्त


माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी मनाई जाएगी। इस बार यह खास है क्योंकि माघ मास का गुप्त नवरात्रि 5 से 14 फरवरी है। वसंत पंचमी सरस्वती पूजा 10, अचला सप्तमी 12 और माघ मास एकादशी 16 फरवरी को है। वसंत पंचमी में पूर्ण अमृत, सवार्थ सिद्धि, रूचक नामक महापुरुष योग, उभयचरी और दुरूधरा योग का संयोग बनेगा।
सूर्योदय के बाद से मध्य दिन तक सरस्वती पूजा होगी। पूजा का मुहुर्त सुबह पांच बजे से पूर्वाह्न 11.30 बजे तक है। उदयकालीन तिथि के अनुसार दिनभर पूजा होगी। पूजा के लिए साढ़े छह घंटे अति शुभ है।
विवाह के लिए चौबीस घंटे तक शुभ मुहुर्त बन रहा है। परिणय सूत्र में बंधने वालों जोड़ों में आजीवन प्रेम का संयोग बनेगा।
इस दिन दोपहर तक ही मुहूर्त है। विद्या की देवी सरस्वती की पूजा गणोश जी के साथ जरूर करनी चाहिए। जो लोग इस दिन पूजा नहीं कर सकते, वे कम से कम इस दिन पीले वस्त्र जरूर पहनें।
बसंत पंचमी से शयन और खानपान के समय भी बदलाव होता है। मंदिरों में भजन, कीर्तन, अनुष्ठान के कार्यक्रम भी होंगे। स्वयं सिद्धि योग होने से सावे, गृह प्रवेश, खरीद फरोख्त भी लाभकारी रहेगा।

बसंत पंचमी पर इन 5 मंत्रों से करें मां सरस्वती का ध्यान, बरसेगी कृपा

बसंत पंचमी पर इन 5 मंत्रों से करें मां सरस्वती का ध्यान, बरसेगी कृपा



बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा इस बार 10 फरवरी को मनाई जाएगी। मां सरस्वती को प्रसन्न करने और उनकी पूजा के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण उनकी वंदना है। तो आइए जानते हैं पांच सरस्वती वंदना या सरस्वती पूजा मंत्र-
1- या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

2- शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनींवीणापुस्तकधारिणीमभयदां। जाड्यान्धकारापहाम्हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।

3- ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम। हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ऊॅं।।

4- ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।। कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्। वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।। रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्। सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।। वन्दे भक्तया वन्दिता च मुनीन्द्रमनुमानवै:।

5- शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे। सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू।'

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

सरस्वती पूजा पर जरूर पढ़ें सरस्वती वंदना, गीत और आरती

सरस्वती पूजा पर जरूर पढ़ें सरस्वती  वंदना, गीत और आरती



मां सरस्वती की पूजा की बात हो और उनकी वंदना या वंदना गीत न हों ऐसे संभव नहीं है। मां सरस्वती वंदना का महत्व प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में रहा है। यही कारण है कि उनकी वंदना के ज्यादातर स्लोक संस्कृत में हैं। हिन्दीं के मूर्धन्य कवि सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" ने जब से 'वीणावादिनि वर दे' की रचना की शायद तब से लोग हिन्दी में उनकी वंदना करने लगे हैं। 10 फरवरी को बसंत पंचमी के मौके पर देशभर के सरस्वती मंदिरों पूजा स्थलों में मां सरस्वती की पूजा की जाएगी। ऐसे में जिन लोगों को मां सरस्वती की कोई भी वंदना या गाना नहीं उनके लिए हम यहां सबसे ज्यादा लोकप्रिय सरस्वती वंदना गीत और वंदना श्लोक दे रहे हैं जिन्हें आप पूजा के दौरान पढ़ सकते हैं ।


सरस्वती वंदना-

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला
या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

सरस्वती वंदना गीत-

वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
        भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
        जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
        नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे।
 - सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"



मां सरस्वती की आरती

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय..

चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी।
सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥ ॐ जय..

बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला।
शीश मुकुट मणी सोहें, गल मोतियन माला ॥ ॐ जय..

देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥ ॐ जय..

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो ॥ ॐ जय..

धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥ ॐ जय..

मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें।
हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें ॥ ॐ जय..

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय..

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ।
सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय..



सरस्वती पूजा की तिथि:

पंचमी तिथि दो दिन होने के कारण बहुत से लोगों में भ्रम की स्थिति की है कि यह त्यौहार कब मनाया जाएगा। बसंत पचमी की उदया तिथि 10 फरवरी को होने के कारण उत्तर प्रदेश समेत देश के अधिकांश हिस्सों में सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का पर्व 10 फरवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषात्रियों के अनुसार 10 फरवरी को ही बसंत पंचमी मनाना शास्त्र सम्मत है।

बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता तो बसंत पंचमी पर करें यह उपाय

बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता तो बसंत पंचमी पर करें यह उपाय


वे छात्र जो पढ़ाई लिखाई में कमजोर हैं अगर बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करें तो उन पर विशेष कृपा होती है।  छात्र इस दिन अपनी किताब-कॉपी और कलम की भी पूजा करते हैं।
बसंत पंचमी का त्‍यौहार 10 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन विद्या और बुद्धी की देवी मानी जाने वाली मां सरस्‍वती की पूजा की जाती है। माना जाता है कि मां सरस्‍वती की जिस बच्‍चे पर भी कृपा बन गई उसकी बुद्धि अन्य बालकों से तेज हो जाएगी। इसलिए बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की अराधना जरूर करनी चाहिए।

वे छात्र जो पढ़ाई लिखाई में कमजोर हैं अगर बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करें तो उन पर विशेष कृपा होती है। छात्र इस दिन अपनी किताब-कॉपी और कलम की भी पूजा करते हैं। पुराने जमाने में बसंत पंचमी के दिन से ही बच्‍चों की शिक्षा आरंभ करवाई जाती थी। यह परपंरा आज भी जीवित है। इस दिन मां सरस्‍वती की पूजा करने के लिए पीला या सफेद कपड़ा धारण करना चाहिए। इसके बाद मां सरस्‍वती को पीले और सफेद पुष्प अर्पित करना चाहिए।
पढ़ाई में सफलता के उपाय

वे बच्‍चे जिनका मन पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगता है उन्‍हें बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को हरे रंग का फल चढ़ाना चाहिए।  इसके अलावा घर में पढ़ाई के कमरे में मां सरस्वती का चित्र लगाना चाहिए, इससे पढ़ाई पर ध्‍यान टिका रहता है।  बच्‍चे को अगर ज्ञानी बनाना है तो इस दिन उसके जीभ पर शहद से ॐ बनाएं।  यदि बच्‍चे अपनी किताबों पर पीले रंग का कवर चढ़ा कर उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं तो उनका कल्‍याण होगा।  इस दिन पूजा करने के दौरान केवल मां सरस्वती की ही नहीं बल्‍कि साथ में श्रीगणेश की मूर्ति की पूजा जरूर करें।
पूजा करते वक्‍त मां सरस्‍वती के सामने मां-बाप बच्‍चों को गोद में बिठाएं और फिर उनके हाथ से भगवान श्री गणेश को फूल अर्पित कर अक्षर अभ्यास कराएं।

सोमवार, 4 फ़रवरी 2019

मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं बसंत पंचमी

मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं बसंत पंचमी
मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं बसंत पंचमी

बसंत पंचमी का त्योहार 10 फ़रवरी को मनाया जाएगा। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। महिलाएं पीले वस्त्र घारण करती है। कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की उत्पत्ति हुई थी। कहते हैं ब्रह्मा जी ने सृष्टि की उत्पत्ति की लेकिन चारों तरफ मौन छाया रहता था। जीवन था लेकिन उसका संगीत नहीं था। तब ब्रह्मा जी ने विष्णु जी की अनुमति लेकर अपने कमंडल के जल से सरस्वती की उत्पत्ति की। जिससे सृष्टि को स्वर मिले। इसलिए बसंत पंचमी को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं।
बसंत के दिनों में पेड़-पौधे भी आपने पुराने पत्ते झड़ा दैते है। वहीं पेड़-पौधे में नए पत्ते आने लगते है। बसंत पंचमी के साथ ही हम सर्दियों के दिन को पीछे छोड़कर बसंत के दिनों में प्रवेश करते हैं। यह दिन सभी तरह के कार्यों के आरंभ के लिए शुभ माना जाता है। इस समय तीर्थों के जल में स्नान का विशेष महत्व है। दूसरा इस समय सूर्य देव उत्तरायण होते हैं। इस दिन कलाकार अपने वाद्य यंत्रों का पूजन करते हैं। कवि, गायक, लेखक, नाटककार सभी इस दिन अपने यंत्रों और सामग्री का पूजन करते हैं। इस दिन कामदेव की पूजा की जाती है। इसी दिन भगवान राम शबरी के आश्रम पहुंचे थे। इस दिन बच्चों को पहला अक्षर लिखना भी सिखाया जाता है। इसे महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला" के जन्मदिवस के रुप में भी जाना जाता है।

इस दिन सुबह-सुबह समस्त कार्यों से निवृत्त होकर मां सरस्वती की आराधना करनी चाहिए। इसके बाद दिन के समय स्नान आदि के बाद भगवान गणेश जी का ध्यान करना चाहिए। स्कंद पुराण के अनुसार सफेद फूल, चन्दन, सफेद वस्त्र धारण करके देवी सरस्वती की पूजा करनी चाहिए।

देवी सरस्वती का मंत्र

सरस्वती जी की पूजा के लिए अष्टाक्षर मूल मंत्र "श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा" है।

रविवार, 3 फ़रवरी 2019

बसंत पंचमी 2019: इस तरह करें मां सरस्वती की पूजा, पढ़ाई में कमजोर छात्र की तेज होगी बुद्धि

बसंत पंचमी 2019: इस तरह करें मां सरस्वती की पूजा, पढ़ाई में कमजोर छात्र की तेज होगी बुद्धि


बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा विधि विधान से की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान-विज्ञान, कला, संगीत और शिल्प की देवी हैं अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए और जीवन में नया उत्साह प्राप्त करने के लिए बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की उपासना पूरे देश में की जाती है। इस दिन पढ़ाई में कमजोर बच्चे मां की आराधना कर और कुछ उपाय कर उनकी कृपा पा सकते है।

मां सरस्वती की पूजा विधि

सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र धारण करें, मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें। मां सरस्वती को सफेद चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करें। उनका ध्यान कर ऊं ऐं सरस्वत्यै नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। मां सरस्वती की आरती करें दूध, दही, तुलसी, शहद मिलाकर पंचामृत का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगाएं।
इस दिन करें ये उपाय

ज्योतिष के अनुसार जिनकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर हो या अस्त हो या बच्चे का पढ़ाई में मन ना लगे तो बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को हरे फल आर्पित करके कम से कम 11 गरीबों को अवश्य बांटना चाहिए।

पढऩे वाले स्थान के पर्दे, कुर्सी के कवर आदि हल्के हरे रखें, काले या गहरे नीले न हों।

सरस्वती माता का चित्र अपने अध्ययन कक्ष या टेबल पर रखें।

अपनी टेबल पर क्रिस्टल या स्फटिक का ग्लोब रखें और उसे दिन में कम से कम तीन बार घुमाएं।

तुलसी के 11 पत्ते मिश्री के साथ गटक जाएं पर चबाएं नहीं।

बसंत पंचमी 2019 : इन 5 उपायों से प्रसन्न होंगी मां सरस्वती, पूरी होगी हर मनोकामना

बसंत पंचमी 2019 : इन 5 उपायों से प्रसन्न होंगी मां सरस्वती, पूरी होगी हर मनोकामना
बसंत पंचमी 2019 : इन 5 उपायों से प्रसन्न होंगी मां सरस्वती, पूरी होगी हर मनोकामना

माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पावन पर्व 10 फरवरी को मनाया जाएगा। यह पावन तिथि ज्ञान की देवी मां सरस्वती की साधना-आराधना के लिए समर्पित है। विद्या-बुद्धि एवं परीक्षा में सफलता जैसी तमाम मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए आखिर किस विधि से की जाए मां सरस्वती की साधना, आईये जानते हैं-

1- यदि आपकी पढ़ाई में अक्सर बाधाएं आती हों, तमाम कोशिशों के बावजूद आपका पढ़ाई में मन नहीं लग पाता हो तो आप बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की साधना पूरे विधि-विधान से अवश्य करें। इस पावन तिथि पर प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात पीले वस्त्र धारण करें और पीले आसन पर बैठकर मां सरस्वती का पूजन करें। मां सरस्वती की पूजा के लिए पीले रंग के ही पुष्प का प्रयोग करें और माता सरस्वती की यह वंदना पूरी श्रद्धा भाव से करें —

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥

2. सभी प्रकार के ऐश्वर्य, ज्ञान, विद्या, बुद्धि की सिद्धि के लिए बसंत पंचमी को अत्यंत ही पावन तिथि माना या है। मान्यता है कि इसी तिथि के दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। यदि परीक्षा-प्रतियोगिता आदि में सफलता को लेकर आपकी कोई मनोकामना है तो आप बसंत पंचमी के दिन स्नान-ध्यान के पश्चात माता माता सरस्वती के चरणों में 108 पीले पुष्प इस दिव्य मंत्र के साथ चढ़ाएं —

ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।।

बसंत पंचमी 2019 : इन 5 उपायों से प्रसन्न होंगी मां सरस्वती, पूरी होगी हर मनोकामना


3. माघ शुक्ल की पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाई जाती है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के पूजन में पीले पुष्प आदि के साथ कुछ अन्य चीजें भी हैं, जिन्हें जरूर अर्पित करना चाहिए। सरस्वती पूजन में कलम और कॉपी जरूर शामिल करें। मान्यता है कि इस उपाय से बुध की स्थिति अनुकूल होती है। मां सरस्वती के आशीर्वाद से साधक की बुद्धि बढ़ती है और स्मरण शक्ति भी अच्छी होती है।

4. मां सरस्वती की पूजा में केसर और पीले चंदन का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। ज्योतिषशास्त्र में इसे गुरु से संबंधित वस्तु कहा गया है जिससे ज्ञान और धन दोनों के मामले में अनुकूलता की प्राप्ति होती है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए चांदी की कटोरी में केसर को भिगोकर उसका टीका मां को लगाएं और प्रसाद स्वरूप खुद भी लगाएं। श्रद्धा भाव के साथ किया गया यह उपाय निश्चित रूप से आपको ज्ञान की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद दिलाएगा।

5- ज्ञान की देवी मां सरस्वती से यदि आप विद्या एवं अच्छी स्मरण शक्ति का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो बसंत पंचमी के दिन उनकी पूजा के दौरान प्रसाद में बूंदी चढ़ाना न भूलें। मान्यता है कि माता सरस्वती को बूंदी का प्रसाद अत्यधिक प्रिय है। बसंत पंचमी का दिन विद्या आरंभ के लिए काफी शुभ माना गया है। इस दिन यदि किसी बच्चे की पढ़ाई की शुरुआत हो तो मां सरस्वती की उस पर पूरी कृपा बरसती है। मान्यता है कि इस दिन बच्चे की जीभ पर शहद से ''ॐ'' की आकृति बनाने पर बच्च्चा आगे चलकर बुद्धिमान और मधुरभाषी होता है।

बसंत पंचमी 2019: इस दिन भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

बसंत पंचमी 2019: इस दिन भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
बसंत पंचमी 2019: इस दिन भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष दिन है। मां सरस्वती को विद्या एवं बुद्धि की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन उनसे विद्या, बुद्धि, कला एवं ज्ञान का वरदान मांगा जाता है। इस साल बसंत पचंमी का त्योहार 10 फरवरी को मनाया जाएगा। लेकिन इस दिन भूलकर भी कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए:

बसंत पंचमी पर न करें 5 गलतियां
1. बसंत पंचमी को काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।

2. बसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। संभव हो तो आज के दिन स्नान और पूजा के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

3.. बसंत पंचमी के दिन किसी से वाद-विवाद या क्रोध नहीं करना चाहिए। बसंत पंचमी पर कलह होने से पितृ को कष्ट पहुंचता है।

4. बसंत पंचमी के दिन बिना नहाए कुछ भी नहीं खाना चाहिए। इस दिन नदी, सरोवर या पास के तालाब में स्नान करना चाहिए और मां सरस्वती की पूजा अराधना के बाद ही कुछ खाना चाहिए।

5. बसंत पंचमी के दिन भूल से भी पेड़-पौधों की कटाई नहीं करनी चाहिए।

शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

बसंत पंचमी कथा और ऐतिहासिक महत्व

बसंत पंचमी कथा और ऐतिहासिक महत्व

बसंत पंचमी कथा 

वसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं।
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।
सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-
प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।
अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और यूँ भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।[2] पतंगबाज़ी का वसंत से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन पतंग उड़ाने का रिवाज़ हज़ारों साल पहले चीन में शुरू हुआ और फिर कोरिया और जापान के रास्ते होता हुआ भारत पहुँचा।
वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है। यों तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला है, पर वसंत पंचमी (माघ शुक्ल 5) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं।
पौराणिक महत्व[संपादित करें]
इसके साथ ही यह पर्व हमें अतीत की अनेक प्रेरक घटनाओं की भी याद दिलाता है। सर्वप्रथम तो यह हमें त्रेता युग से जोड़ती है। रावण द्वारा सीता के हरण के बाद श्रीराम उसकी खोज में दक्षिण की ओर बढ़े। इसमें जिन स्थानों पर वे गये, उनमें दंडकारण्य भी था। यहीं शबरी नामक भीलनी रहती थी। जब राम उसकी कुटिया में पधारे, तो वह सुध-बुध खो बैठी और चख-चखकर मीठे बेर राम जी को खिलाने लगी। प्रेम में पगे झूठे बेरों वाली इस घटना को रामकथा के सभी गायकों ने अपने-अपने ढंग से प्रस्तुत किया। दंडकारण्य का वह क्षेत्र इन दिनों गुजरात और मध्य प्रदेश में फैला है। गुजरात के डांग जिले में वह स्थान है जहां शबरी मां का आश्रम था। वसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी वहां आये थे। उस क्षेत्र के वनवासी आज भी एक शिला को पूजते हैं, जिसके बारे में उनकी श्रध्दा है कि श्रीराम आकर यहीं बैठे थे। वहां शबरी माता का मंदिर भी है।

ऐतिहासिक महत्व

वसंत पंचमी का दिन हमें पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी हमलावर मोहम्मद गौरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद गौरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ अफगानिस्तान ले गया और उनकी आंखें फोड़ दीं।
इसके बाद की घटना तो जगप्रसिद्ध ही है। गौरी ने मृत्युदंड देने से पूर्व उनके शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा। पृथ्वीराज के साथी कवि चंदबरदाई के परामर्श पर गौरी ने ऊंचे स्थान पर बैठकर तवे पर चोट मारकर संकेत किया। तभी चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया।
चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान ॥
पृथ्वीराज चौहान ने इस बार भूल नहीं की। उन्होंने तवे पर हुई चोट और चंदबरदाई के संकेत से अनुमान लगाकर जो बाण मारा, वह गौरी के सीने में जा धंसा। इसके बाद चंदबरदाई और पृथ्वीराज ने भी एक दूसरे के पेट में छुरा भौंककर आत्मबलिदान दे दिया। (1192 ई) यह घटना भी वसंत पंचमी वाले दिन ही हुई थी।
वसंत पंचमी का लाहौर निवासी वीर हकीकत से भी गहरा संबंध है। एक दिन जब मुल्ला जी किसी काम से विद्यालय छोड़कर चले गये, तो सब बच्चे खेलने लगे, पर वह पढ़ता रहा। जब अन्य बच्चों ने उसे छेड़ा, तो दुर्गा मां की सौगंध दी। मुस्लिम बालकों ने दुर्गा मां की हंसी उड़ाई। हकीकत ने कहा कि यदि में तुम्हारी बीबी फातिमा के बारे में कुछ कहूं, तो तुम्हें कैसा लगेगा?
बस फिर क्या था, मुल्ला जी के आते ही उन शरारती छात्रों ने शिकायत कर दी कि इसने बीबी फातिमा को गाली दी है। फिर तो बात बढ़ते हुए काजी तक जा पहुंची। मुस्लिम शासन में वही निर्णय हुआ, जिसकी अपेक्षा थी। आदेश हो गया कि या तो हकीकत मुसलमान बन जाये, अन्यथा उसे मृत्युदंड दिया जायेगा। हकीकत ने यह स्वीकार नहीं किया। परिणामत: उसे तलवार के घाट उतारने का फरमान जारी हो गया।
कहते हैं उसके भोले मुख को देखकर जल्लाद के हाथ से तलवार गिर गयी। हकीकत ने तलवार उसके हाथ में दी और कहा कि जब मैं बच्चा होकर अपने धर्म का पालन कर रहा हूं, तो तुम बड़े होकर अपने धर्म से क्यों विमुख हो रहे हो? इस पर जल्लाद ने दिल मजबूत कर तलवार चला दी, पर उस वीर का शीश धरती पर नहीं गिरा। वह आकाशमार्ग से सीधा स्वर्ग चला गया। यह घटना वसंत पंचमी (23.2.1734) को ही हुई थी। पाकिस्तान यद्यपि मुस्लिम देश है, पर हकीकत के आकाशगामी शीश की याद में वहां वसंत पंचमी पर पतंगें उड़ाई जाती है। हकीकत लाहौर का निवासी था। अत: पतंगबाजी का सर्वाधिक जोर लाहौर में रहता है।
वसंत पंचमी हमें गुरू रामसिंह कूका की भी याद दिलाती है। उनका जन्म 1816 ई. में वसंत पंचमी पर लुधियाना के भैणी ग्राम में हुआ था। कुछ समय वे रणजीत सिंह की सेना में रहे, फिर घर आकर खेतीबाड़ी में लग गये, पर आध्यात्मिक प्रवष्त्ति होने के कारण इनके प्रवचन सुनने लोग आने लगे। धीरे-धीरे इनके शिश्यों का एक अलग पंथ ही बन गया, जो कूका पंथ कहलाया।
गुरू रामसिंह गोरक्षा, स्वदेशी, नारी उध्दार, अंतरजातीय विवाह, सामूहिक विवाह आदि पर बहुत जोर देते थे। उन्होंने भी सर्वप्रथम अंग्रेजी शासन का बहिश्कार कर अपनी स्वतंत्र डाक और प्रशासन व्यवस्था चलायी थी। प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर भैणी गांव में मेला लगता था। 1872 में मेले में आते समय उनके एक शिष्य को मुसलमानों ने घेर लिया। उन्होंने उसे पीटा और गोवध कर उसके मुंह में गोमांस ठूंस दिया। यह सुनकर गुरू रामसिंह के शिष्य भड़क गये। उन्होंने उस गांव पर हमला बोल दिया, पर दूसरी ओर से अंग्रेज सेना आ गयी। अत: युध्द का पासा पलट गया।
इस संघर्ष में अनेक कूका वीर शहीद हुए और 68 पकड़ लिये गये। इनमें से 50 को सत्रह जनवरी 1872 को मलेरकोटला में तोप के सामने खड़ाकर उड़ा दिया गया। शेष 18 को अगले दिन फांसी दी गयी। दो दिन बाद गुरू रामसिंह को भी पकड़कर बर्मा की मांडले जेल में भेज दिया गया। 14 साल तक वहां कठोर अत्याचार सहकर 1885 ई. में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।
जन्म दिवस[संपादित करें]
वसंत पंचमी हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्मदिवस (28.02.1899) भी है। निराला जी के मन में निर्धनों के प्रति अपार प्रेम और पीड़ा थी। वे अपने पैसे और वस्त्र खुले मन से निर्धनों को दे डालते थे। इस कारण लोग उन्हें 'महाप्राण' कहते थे।

बसंत पंचमी पर ऐसे करें सरस्वती पूजन जानिये पूजन के लाभ और विशेष प्रयोग

बसंत पंचमी पर ऐसे करें सरस्वती पूजन जानिये पूजन के लाभ और विशेष प्रयोग


बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की विशेष कृपा होती है. इस दिन सफेद और पीले रंग का खास महत्व होता है. इस पर्व पर ज्ञान की देवी कही जाने वाली मां सरस्वती की विशेष पूजा से इंसान की बुद्धि मजबूत होती है. 

 बसंत पंचमी पर ऐसे करें सरस्वती पूजन -

- बसंत पंचमी पर पीले, बसंती या सफेद कपड़े पहनें, काले या लाल कपड़े बिल्कुल न पहनें.
- इसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा शुरू करें.
- सूर्योदय के बाद ढाई घंटे या सूर्यास्त के बाद ढाई घंटे पूजा करना शुभ होगा.
- मां सरस्वती को सफेद चन्दन, पीले और सफेद फूल जरूर चढ़ाएं.
- प्रसाद में मां को मिश्री, दही और लावा चढ़ाएं.
- केसर वाली खीर का भोग लगाने से मां सरस्वती प्रसन्न होंगी.
- मां सरस्वती के मूल मंत्र "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" का जाप करें.
- मंत्र जाप के बाद प्रसाद ग्रहण करें.

 बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन के लाभ -

- जिन लोगों को एकाग्रता की समस्या है, उन्हें बसंत पंचमी के दिन से रोज सुबह सरस्वती वंदना का पाठ शुरू करना चाहिए.
- जहां आप पढ़ते है उस जगह देवी सरस्वती की मूर्ति रखें.
- मां सरस्वती का बीज मंत्र लिखकर टांगना भी शुभ होगा.
- जिन लोगों को सुनने या बोलने की समस्या है वो सोने या पीतल के चौकोर टुकड़े पर मां सरस्वती का बीज मंत्र "ऐं" लिखकर पहन सकते हैं.
- संगीत के क्षेत्र में लाभ चाहिए तो केसर अभिमंत्रित करके जीभ पर "ऐं" लिखवाएं.
- किसी धार्मिक व्यक्ति या माता से "ऐं" लिखवाना अच्छा होगा.

बसंत पंचमी के विशेष प्रयोग -

बसंत पंचमी को कुछ प्रयोगों के लिए भी शुभ माना जाता है. ज्योतिष में कुछ ऐसे विशेष प्रयोग हैं जो आपकी विद्या, बुद्धि और ज्ञान से जुड़ी ख्वाहिशों को पूरा कर सकते हैं.
- बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती को कलम चढ़ाएं और पूरे साल उसी कलम का इस्तेमाल करें.
- बसंत पंचमी के दिन पीले या सफेद कपड़े जरूर पहनें. काले रंग से दूर रहें.
- इस दिन केवल सात्विक भोजन ही करें, अच्छी सेहत और प्रसन्नता मिलेगी.
- बसंत पंचमी पर पुखराज और मोती पहनना बहुत लाभकारी होता है.
- इस तिथि पर स्फटिक की माला को मंत्र सिद्ध करके पहनना भी शुभ होगा.
- इस दिन खीर जरूर बनाएं और खाएं, घर को सुगन्धित बनाए रखें.
- लेखन में सफलता पाना चाहते हैं तो कुछ भी लिखने से पहले "ऐं" लिखें.

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा ,बसंत पंचमी का महत्व और पूजा का मुहूर्त 2019

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा ,बसंत पंचमी का महत्व और पूजा का मुहूर्त






 बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा ,बसंत पंचमी का महत्व और पूजा का मुहूर्त

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती पूजा और वसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है। आज हम आपको सरस्वती पूजा का महत्व और सरस्वती पूजा क्यों मनाई जाती है उसके बारे में बता रहे हैं।
देवी सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं। सृष्टि की रचना के लिए देवी शक्ति में अपने आप को पांच भागों में विभक्त कर लिया। वे देवी राधा, पार्वती, सावित्री, दुर्गा और सरस्वती के रूप में भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न अंगों से प्रकट हुईं। उस समय श्री कृष्ण के कंठ से उत्पन्न हुए देवी को सरस्वती के नाम से जाना जाने लगा। देवी सरस्वती के अनेक नाम हैं। जिनमें से वाक्, वाणी, गी, गिरा, बाधा, शारदा, वाचा, श्रीश्वरी, वागीश्वरी, ब्राह्मी, गौ, सोमलता, वाग्देवी और वाग्देवता आदि प्रसिद्ध नाम है।

सरस्वती देवी सौम्य गुणों की दात्री और देवों की रक्षक हैं। सृष्टि का निर्माण इनकी मदद से हुआ है। इसीलिए माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती पूजा के नाम से मनाया जाता है। माना जाता है इस दिन देवी सरस्वती का पूजन करने से विद्या और वाणी का वरदान मिलता है।
सरस्वती पूजा को वसंत पंचमी के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन देवी सरस्वती की विधिवत पूजा करके वसंतोत्सव मनाया जाता है और माँ की आराधना की जाती है। यह पूजा प्रत्येक वर्ष इसी दिन की जाती है जिसके साथ-साथ छोटे बालकों का अक्षरारंभ और विद्यारंभ भी किया जाता है।

वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा

माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को प्रातःकाल जागकर देवी की पूजा करनी चाहिए। स्तुति के बाद संगीत आराधना भी करनी चाहिए। इसके बाद निवेदित गंध, पुष्प, मिष्ठानादि का प्रसाद चढ़ाकर सभी में बांटना चाहिए। विद्या से जुड़ी वस्तुओं में भी देवी सरस्वती का निवास स्थान माना जाता है इसीलिए उनकी भी पूजा करें। तिलक, अक्षत लगाकर भोग लगाएं और धूप-दीप करें। अंत में प्रणाम करके माँ सरस्वती से प्रार्थना करें और विद्या का वरदान मांगे।
सफ़ेद वस्तुओं का प्रयोग करें
माघ शुक्ल पंचमी को अनध्याय भी कहा जाता है। देवी सरस्वती की उत्पत्ति सत्वगुण से हुई है। इनकी पूजा-आराधना में हमेशा श्वेत वर्ण की वस्तुओं का ही प्रयोग किया जाता है। जैसे – दूध, दही, मक्खन, सफ़ेद तिल के लड्डू, गन्ना या गन्ने का रस, पका हुआ गुड़, मधु, श्वेत चन्दन, श्वेत पुष्प, श्वेत परिधान, श्वेत अलंकार, खोए का श्वेत मिष्ठान, अदरक, मूली, शर्करा, सफ़ेद धान के अक्षत, तण्डुल, शुक्ल मोदक, पके हुए केले की फली का पिष्टक, नारियल, नारियल जल, श्रीफल, बदरीफल, पुष्प फल आदि।

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त 2019 

ज्योतिष के अनुसार, वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) के दिन को सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन को अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जानते हैं। नए कार्यों की शुरुवात के लिए इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है। परंतु विवाह और उससे जुड़े कार्यों के लिए पंचांग में दिए गए मुहूर्त को ही चुनना चाहिए।

सरस्वती पूजा 2019 (वसंत पंचमी 2019)
2019 में वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) 10 फरवरी 2019, रविवार को मनाई जाएगी। 

वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा 2019 का शुभ मुहूर्त
सरस्वती पूजा मुहूर्त = 07:15 से 12:52

पंचमी तिथि का आरंभ = 9 फरवरी 2019, शनिवार को 12:25 बजे से होगा। 
पंचमी तिथि समाप्त = 10 फरवरी 2019, रविवार को 14:08 बजे होगा।

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