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सोमवार, 15 जुलाई 2019

चंद्र ग्रहण के वक्त गर्भवती महिलाएं ध्यान रखें ये बातें

चंद्र ग्रहण के वक्त गर्भवती महिलाएं ध्यान रखें ये बातें


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इस साल यानी 2019 में चंद्र ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में 16 जुलाई-17 जुलाई 2019 की मध्य में यानी मंगलवार को रात 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। यह चंद्र ग्रहण खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहलायेगा। चंद्र ग्रहण की यह अवधि लगभग 3 घंटे की होगी । चंद्र ग्रहण का सभी राशियों पर अलग - अलग प्रभाव पड़ेगा। 

गर्भवती महिलाओं पर चंद्र ग्रहण का असर

माना जाता है कि किसी भी ग्रहण असर सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं पर होता है। क्योंकि ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा काफी ज्यादा रहती है। ज्योतिषाचार्यों द्वारा ग्रहण काल के दौरान गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। बाहर निकलना जरूरी हो तो गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। इससे ग्रहण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर नहीं होगा। ग्रहण काल के दौरान यदि खाना जरूरी हो तो सिर्फ खानपान की उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें जिनमें सूतक लगने से पहले तुलसी पत्र या कुशा डला गया हो। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान चाकू, छुरी, ब्लेड, कैंची जैसी काटने की किसी भी वस्तु का प्रयोग न करें। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है। इस दौरान सुई धागे का प्रयोग भी वर्जित है। ग्रहण काल के दौरान भगवान का नाम लेने के अलावा कोई दूसरा काम न करें।

ग्रहण काल में रखें ये सावधानियां -

- ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।
- ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
- ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।
- ग्रहण को खुली आंखों से न देखें। हालांकि चंद्र ग्रहण देखने से आंखों पर कोई बुरा असर नहीं होता।
- ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।
 

16 जुलाई को लगेगा चंद्र ग्रहण, 149 सालों बाद बन रहा है ऐसा संयोग ध्यान रखें कुछ ख़ास बातें

16 जुलाई को लगेगा चंद्र ग्रहण, 149 सालों बाद बन रहा है ऐसा संयोग ध्यान रखें कुछ ख़ास बातें 


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इस साल का दूसरा Chandra Grahan 2019 16 और 17 जुलाई की दर्मयानी रात को लग रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार ग्रहण आषाढ़ पूर्णिमा की रात को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में धनु राशि में लग रहा है। 

बन रहा दुर्लभ योग : 

इस बार के चंद्र ग्रहण पर 149 साल बाद चंद्र ग्रहण और गुरु पूर्णिमा के साथ ग्रहों का दुर्लभ योग बन रहा है। इस बार ग्रहण के समय शनि और केतु चंद्रमा के साथ धनु राशि में हों, जिससे ग्रहण का ज्यादा प्रभाव पड़गा। सूर्य के साथ राहु और शुक्र भी रहेंगे। ज्योतिष विशेषज्ञ पंडित कृपाशंकर झा का कहना है कि सूर्य और चंद्र 4 विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। इस दौरान मंगल नीच का रहेगा। ऐसा ही योग 12 जुलाई 1870 को 149 साल पहले बना था, जब गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हुआ था। उस समय भी शनि, केतु और चंद्र के साथ धनु राशि में स्थित था, जबकि सूर्य राहु के साथ मिथुन राशि में स्थित था।

रहेगा प्राकृतिक आपदा और भूकंप का खतरा 

 ग्रहों का यह योग और इस पर लगने वाला चंद्र ग्रहण तनाव बढ़ाने वाला हो सकता है। इस दौरान भूकंप का खतरा रहेगा और अन्य प्रकृतिक आपदाओं से नुकसान भी हो सकता है। ग्रहण के समय ग्रहों की स्थित के चलते परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
हिंदू पंचांग देखें तो इस बार चंद्र ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है। यह चंद्रग्रहण खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है। इस बार चंद्र ग्रहण का समय 3 घंटे का होगा। ग्रहणकाल में प्रकृति के भीतर कई तरह की नकारात्मक और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। लिहाजा इस दौरान कई ऐसे काम हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए। 

  • ग्रहण के दौरान अन्न जल ग्रहण नहीं करना चाहिेए।
  • चंद्र ग्रहण के दौरान स्नान नहीं करना चाहिए। यह खत्म होने के बाद या इससे पहले स्नान कर लें। 
  • ग्रहण को कभी भी खुली आंख से नहीं देखना चाहिए। इसका आंखों पर बुरा असर पड़ता है।
  • ग्रहण के समय मंत्रो का जाप किया जा सकता है।

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