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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

श्री सत्यनारायण जी की आरती

श्री सत्यनारायण जी की आरती

श्री सत्यनारायण जी की आरती


ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा |
सत्यनारायण स्वामी ,जन पातक हरणा
रत्नजडित सिंहासन , अद्भुत छवि राजें |
नारद करत निरतंर घंटा ध्वनी बाजें ॥
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी....
प्रकट भयें कलिकारण ,द्विज को दरस दियो |
बूढों ब्राम्हण बनके ,कंचन महल कियों ॥
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....
दुर्बल भील कठार, जिन पर कृपा करी |
च्रंदचूड एक राजा तिनकी विपत्ति हरी ॥
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....
वैश्य मनोरथ पायों ,श्रद्धा तज दिन्ही |
सो फल भोग्यों प्रभूजी , फेर स्तुति किन्ही ॥
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....
भाव भक्ति के कारन .छिन छिन रुप धरें |
श्रद्धा धारण किन्ही ,तिनके काज सरें ॥
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....
ग्वाल बाल संग राजा ,वन में भक्ति करि |
मनवांचित फल दिन्हो ,दीन दयालु हरि ॥
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....
चढत प्रसाद सवायों ,दली फल मेवा |
धूप दीप तुलसी से राजी सत्य देवा ॥
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....
सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावे |
ऋद्धि सिद्धी सुख संपत्ति सहज रुप पावे ॥
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा|
सत्यनारायण स्वामी ,जन पातक हरणा ॥

सोमवार, 3 दिसंबर 2018

श्री भौमिया जी की आरती

श्री भौमिया जी की आरती


श्री भौमिया जी की आरती

ॐ जय भौमिया राजा, स्वामी जय भौमिया राजा। 
बाबा जय मंगल करना, बाबा जय आनन्द करना ।।
भक्तजनों के बिगड़े, सारो सब काजा । ॐ जय...
मुकुट छत्र श्री राजे, कुण्डल छवि न्यारि स्वामी ।
नीले अश्व विराजे, झांकी अति प्यारी ।। ॐ जय...
तन केसरिया जामो, गल पुष्पन माला स्वामी ।
खड़ग हस्त मे सोहे, भाल तिलक आला ।। ॐ जय...
पहाड़ो में बण्यो देवरो, ज्योति अखण्ड जरे स्वामी ।
दूर-दूर से आवे यात्री, उनका कष्ट हरे ।। ॐ जय...
पान-सुपारी, इत्र सुगन्धित, चौला नित्य चढ़ता स्वामी ।
ध्वजा नारियल धुप दीप, नैवेद्घ भोग लगता ।। ॐ जय...
नित्य दर्शन को आते, नर-नारी स्वामी ।
निरख छवि सुख पाते, महिमा अति न्यारी ।। ॐ जय...
हो अन्न धन के दाता, दीनन हितकारी स्वामी ।
मुख में पान सुशोभित, बाबा मणि धारी ।। ॐ जय...
भक्तगण अरज करत है, हे अन्तर्यामी स्वामी ।
बेडा पार लगाओ, हो सबके स्वामी ।। ॐ जय...
ॐ जय भौमिया राजा, स्वामी जय भौमिया राजा।
बाबा जय मंगल करना, बाबा जय आनन्द करना ।।

श्री भैरव बाबा की आरती

श्री भैरव बाबा की आरती


श्री भैरव बाबा की आरती


जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा । 
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ।। जय भैरव देवा। 
तुम्हीं पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक । 
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ।। जय भैरव देवा। 
वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी । 
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ।। जय भैरव देवा। 
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे । 
चौमुख दीपक दर्शन दुःख खोवे ।। जय भैरव देवा। 
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी । 
कृपा करिये भैरव करिए नहीं देरी ।। जय भैरव देवा। 
पांव घुंघरु बाजत अरु डमरु डमकावत । 
बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषावत ।। जय भैरव देवा। 
बटकुनाथ की आरती जो कोई नर गावे । 
कहे धरणीधर नर मनवांछित फल पावे ।। 
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा ।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ।। जय भैरव देवा।

श्री अन्नपूर्णा माता की आरती


श्री अन्नपूर्णा माता की आरती

श्री अन्नपूर्णा माता की आरती


ओम जय अन्नपूर्णा माता, जय अन्नपूर्णा माता। 
ब्रह्‌मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥ 
अरिकुल पद्‌म विनाशिनि जन सेवक त्राता। 
जगजीवन जगदम्‍बा हरिहर गुणगाता॥ 
सिंह को वाहन साजे कुण्डल हैं साथा। 
देव वृन्‍द जस गावत नृत्‍य करत ताथा॥ 
सतयुग रूपशील अति सुन्‍दर नाम सती कहलाता। 
हेमाचल घर जनमी सखियन सँगराता॥ 
शुंभनिशुंभ बिदारे हेमाचल स्‍थाता। 
सहस्‍त्र भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा॥ 
सृष्टिरूप तू ही है जननी शिव संग रंगराता। 
नदी भृंगी बीन लही हे मदमाता॥ दे
वन अरज करत तव चित को लाता। 
गावत दे दे ताली मन मे रंगराता॥ 
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता। 
सदा सुखी नित रहता सुख संपत्‍ति पाता॥ 
ओम जय अन्नपूर्णा माता, जय अन्नपूर्णा माता । 
ब्रह्‌मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

श्री रानी सती मैया की आरती

श्री रानी सती मैया की आरती

श्री रानी सती मैया की आरती


जय श्री रानी सती मैया, जय श्री रानी सती | 
अपने भक्त जनों की दूर करने विपत्ति || 
जय श्री रानी सती....
अवनि अनवर ज्योति अखंडित मंडित चहुँ कुकुमा |
दुर्जन दलन खंग की विद्युत् सम प्रतिभा ||
जय श्री रानी सती....
मरकत मणि मन्दिर अति मंजुल शोभा लाख न परे|
ललित ध्वजा चहुँ और कंचन कलस धरे ||
जय श्री रानी सती....
घंटा घनन घडावल बाजे शंख मृदंग धुरे |
किंनर गायन करते वेद ध्वनि उचरे ||
जय श्री रानी सती....
सप्त मातृका करें आरती सुरगण ध्यान धरे |
विविध प्रकार के व्यंजन श्री भेंट धरे ||
जय श्री रानी सती....
संकट विकट विडानि नाशनि हो कुमती |
सेवक जन हृदि पटले मृदुल करन सुमती ||
जय श्री रानी सती....
अमल कमल दल लोचनि मोचनि त्रय तापा |
"शांति " सुखी मैया तेरी शरण गही माता || 
जय श्री रानी सती....
या मैया जी की आरती जो कोई नर गावे |
सदन सिद्धि नवनिधि फल मन वांछित पावें ||
जय श्री रानी सती....

श्री सूर्यदेव की आरती

श्री सूर्यदेव की आरती


श्री सूर्यदेव की आरती


 ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।
सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे। तुम हो देव महान।। ऊँ जय सूर्य ……
ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान ।। ऊँ जय सूर्य ……
संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधुली बेला में हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान ।। ऊँ जय सूर्य ……
देव दनुज नर नारी ऋषी मुनी वर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्त्रोत ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान ।। ऊँ जय सूर्य ……
तुम हो त्रिकाल रचियता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल बृद्धि और ज्ञान ।। ऊँ जय सूर्य ……
भूचर जल चर खेचर, सब के हो प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद पुराण बखाने धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्व शक्तिमान ।। ऊँ जय सूर्य ……
पूजन करती दिशाएं पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशमान ।। ऊँ जय सूर्य ……
ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र रूवरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।

श्री सीता माता की आरती

श्री सीता माता की आरती


श्री सीता माता की आरती


सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब मिलिकय करियनु आरती।
संगहि सुशोभित लछुमन-राम सब मिलिकय करियनु आरती।।
विपदा विनाशिनि सुखदा चराचर,सीता धिया बनि अयली सुनयना घर
मिथिला के महिमा महान...सब मिलिकय करियनु आरती।।सीता बिराजथि...
सीता सर्वेश्वरि ममता सरोवर,बायाँ कमल कर दायाँ अभय वर
सौम्या सकल गुणधाम.....सब मिलिकय करियनु आरती।। सीता बिराजथि...
रामप्रिया सर्वमंगल दायिनि,सीता सकल जगती दुःखहारिणि
करथिन सभक कल्याण...सब मिलिकय करियनु आरती।। सीता बिराजथि...
सीतारामक जोड़ी अतिभावन,नैहर सासुर कयलनि पावन
सेवक छथि हनुमान...सब मिलिकय करियनु आरती।।सीता बिराजथि...
 शुक्ल नवमी तिथि वैशाख मासे,'चंद्रमणि' सीता उत्सव हुलासे
पायब सकल सुखधाम...सब मिलिकय करियनु आरती।।
सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब मिलिकय करियनु आरती।।।

श्री साईं बाबा की आरती

श्री साईं बाबा की आरती


श्री साईं बाबा की आरती


आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा । 
चरणों के तेरे हम पुजारी साईँ बाबा ॥ 
विद्या बल बुद्धि, बन्धु माता पिता हो । 
तन मन धन प्राण, तुम ही सखा हो ॥ 
हे जगदाता अवतारे, साईँ बाबा । 
आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ॥ 
ब्रह्म के सगुण अवतार तुम स्वामी । 
ज्ञानी दयावान प्रभु अंतरयामी ॥ 
सुन लो विनती हमारी साईँ बाबा । 
आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ॥ 
आदि हो अनंत त्रिगुणात्मक मूर्ति । 
सिंधु करुणा के हो उद्धारक मूर्ति ॥ 
शिरडी के संत चमत्कारी साईँ बाबा । 
आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ॥ 
भक्तों की खातिर, जनम लिये तुम । 
प्रेम ज्ञान सत्य स्नेह, मरम दिये तुम ॥ 
दुखिया जनों के हितकारी साईँ बाबा । 
आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ॥

श्री सरस्वती माता की आरती


श्री सरस्वती माता की आरती


श्री सरस्वती माता की आरती


कज्जल पुरित लोचन भारे स्तन युग शोभित मुक्त हारे,
वीणा पुस्तक रंजित हस्ते भगवती भारती देवी नमस्ते ॥
जय सरस्वती माता जय जय हे सरस्वती माता,
सदगुण वैभव शालिनी त्रिभुवन विख्याता ॥ 
जय सरस्वती माता ॥
चंद्रवदनि पदमासिनी घुति मंगलकारी,
सोहें शुभ हंस सवारी अतुल तेजधारी ॥ 
जय सरस्वती माता ॥
बायेँ कर में वीणा दायें कर में माला,
शीश मुकुट मणी सोहें गल मोतियन माला ॥ 
जय सरस्वती माता ॥
देवी शरण जो आयें उनका उद्धार किया, 
पैठी मंथरा दासी रावण संहार किया ॥
जय सरस्वती माता ॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनी ज्ञान प्रकाश भरो, 
मोह और अज्ञान तिमिर का जग से नाश करो ॥
जय सरस्वती माता ॥
धुप दिप फल मेवा माँ स्वीकार करो,
ज्ञानचक्षु दे माता भव से उद्धार करो ॥
जय सरस्वती माता ॥
माँ सरस्वती जी की आरती जो कोई नर गावें, 
हितकारी सुखकारी ग्यान भक्ती पावें ॥
जय सरस्वती माता ॥
जय सरस्वती माता जय जय हे सरस्वती माता,
सदगुण वैभव शालिनी त्रिभुवन विख्याता॥ 
जय सरस्वती माता ॥

श्री गायत्री जी की आरती

श्री गायत्री जी की आरती

श्री गायत्री जी की आरती

आरती श्री गायत्री जी की, 
ज्ञान दीप और श्रद्धा की बाती सो भक्ति ही पूर्ति करै जहं घी की | 
आरती श्री गायत्री जी की |
मानस की शुची थाल के ऊपर देवी की ज्योति जगै, जहं निकी| 
आरती श्री गायत्री जी की |
शुद्ध मनोरथ के जहां घंण्‍टा, बाजै करै पूरी आसहु ही की | 
आरती श्री गायत्री जी की | 
जाके समक्ष हमें तिहु लोक कै गद्धी मिलै तबहूं लगे फीकी| 
आरती श्री गायत्री जी की | 
संकट आवै न पास कबौ तिन्हे सम्पदा औ सुख की बनै लिकी| 
आरती श्री गायत्री जी की | 
आरती प्रेम सो नेम सों करि ध्यावहिं मूर्ति ब्रम्हा लली की | 
आरती श्री गायत्री जी की |

श्री राधा जी की आरती

श्री राधा जी की आरती

श्री राधा जी की आरती

ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण
ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण
श्री राधा कृष्णाय नमः ..
घूम घुमारो घामर सोहे जय श्री राधा
पट पीताम्बर मुनि मन मोहे जय श्री कृष्ण .
जुगल प्रेम रस झम झम झमकै
श्री राधा कृष्णाय नमः ..
राधा राधा कृष्ण कन्हैया जय श्री राधा
भव भय सागर पार लगैया जय श्री कृष्ण .
मंगल मूरति मोक्ष करैया
श्री राधा कृष्णाय नमः

श्री खाटू श्याम जी की आरती




श्री खाटू श्याम जी की आरती



ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे ।
ॐ जय श्री श्याम हरे....
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे ।
तन केसरिया बागो, कुंडल श्रवण पड़े ।
ॐ जय श्री श्याम हरे....
गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे ।
खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले ।
ॐ जय श्री श्याम हरे....
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे ।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे ।
ॐ जय श्री श्याम हरे....
झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे ।
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे ।
ॐ जय श्री श्याम हरे....
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे ।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे ।
ॐ जय श्री श्याम हरे....
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे ।
कहत भक्तजन, मनवांछित फल पावे ।
ॐ जय श्री श्याम हरे....
जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे ।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे ।
ॐ जय श्री श्याम हरे....

श्री कृष्णा जी की आरती




श्री कृष्णा जी की आरती



श्री कृष्णा जी की आरती

आरती युगल किशोर की कीजै। 
राधे तन मन धन न्यौछावर कीजै॥ 
रवि शशि कोटि बदन की शोभा। 
ताहि निरख मेरो मन लोभा॥ 
गौर श्याम मुख निरखत रीझै। 
प्रभु को रुप नयन भर पीजै॥ 
कंचन थार कपूर की बाती। 
हरि आए निर्मल भई छाती॥ 
फूलन की सेज फूलन की माला। 
रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला॥ 
मोर मुकुट कर मुरली सोहे। 
नटवर वेष देख मन मोहे॥ 
ओढ़े पीत नील पट सारी। 
कुंज बिहारी गिरिवर धारी॥ 
श्री पुरुषोत्तम गिरिवर धारी। 
आरति करत सकल ब्रज नारी॥ 
नंदनंदन वृषभानु किशोरी। 
परमानन्द स्वामि अविचल जोरी॥

श्री शनिदेव जी की आरती



श्री शनिदेव जी की आरती


श्री शनिदेव जी की आरती



जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी । 
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ।।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।।
नीलाम्बर धार नाथ गज की अस्वारी ।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।।
क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी । 
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ।। 
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
मोदक मिष्ठान पान चढ़त है सुपारी ।। 
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ।। 
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी । 
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरन नर नारी ।।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी । 
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।।

श्री विन्धेश्वरी माता की आरती

श्री विन्धेश्वरी माता की आरती

श्री विन्धेश्वरी माता की आरती 

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, तेरा पार न पाया |
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले तेरी भेंट चढ़ाया | 
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, सुवा चोली तेरे अंग विराजै, केसर तिलक लगाया | 
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, नंगे पग अकबर आया, सोने का छत्र चढ़ाया |
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, ऊंचे पर्वत भयो देवालय, नीचे शहर बसाया |
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, सतयुग, त्रेता द्वापर मध्ये, कलियुग राज सवाया | 
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, धूप दीप नैवेघ आरती, मोहन भोग लगाया | 
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गावै, मनवांछित फल पावैं | 
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि, तेरा पार न पाया |

श्री बृहस्पति देव की आरती


श्री बृहस्पति देव की आरती




श्री बृहस्पति देव की आरती


जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥
सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥

श्री पार्वती माता की आरती


श्री पार्वती माता की आरती


श्री पार्वती माता की आरती 


जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्मा सनातन देवी शुभफल की दाता ।।
अरिकुलापदम बिनासनी जय सेवक्त्राता,
जगजीवन जगदंबा हरिहर गुणगाता ।।
सिंह को बाहन साजे कुण्डल हैं साथा,
देबबंधु जस गावत नृत्य करा ताथा ।।
सतयुगरूपशील अतिसुन्दर नामसतीकहलाता,
हेमाचल घर जन्मी सखियन संग राता ।।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमाचल स्थाता,
सहस्त्र भुजा धरिके चक्र लियो हाथा ।।
सृष्टिरूप तुही है जननी शिव संगरंग राता,
नन्दी भृंगी बीन लही है हाथन मद माता ।।
देवन अरज करत तब चित को लाता,
गावन दे दे ताली मन में रंगराता ।।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता ,
सदा सुखी नित रहता सुख सम्पति पाता ।।

श्री जगदम्बे काली माता की आरती







श्री जगदम्बे काली माता की आरती


अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली |
तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती || 
तेरे भक्त जनों पे माता, भीर पड़ी है भारी | 
दानव दल पर टूट पडो माँ, करके सिंह सवारी || 
सौ सौ सिंहों से तु बलशाली, दस भुजाओं वाली | 
दुखिंयों के दुखडें निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती || 
माँ बेटे का है इस जग में, बडा ही निर्मल नाता | 
पूत कपूत सूने हैं पर, माता ना सुनी कुमाता ||
सब पर करुणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली | 
दुखियों के दुखडे निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती || 
नहीं मांगते धन और दौलत, न चाँदी न सोना | 
हम तो मांगे माँ तेरे मन में, इक छोटा सा कोना || 
सबकी बिगडी बनाने वाली, लाज बचाने वाली |
सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती || 
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली |
तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ||

श्री दुर्गा माता की आरती

श्री दुर्गा माता की आरती



श्री दुर्गा माता की आरती


जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी। 
निशिदिन तुमको ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी॥ जय अम्बे
माँग सिन्दूर विराजत, टीको, मृगमद को। 
उज्जवल से दोउ नयना, चन्द्रबदन नीको॥ जय अम्बे
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। 
रक्त पुष्प गलमाला, कंठ हार साजे॥ जय अम्बे
हरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दु:ख हारी॥ जय अम्बे
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम जोती॥ जय अम्बे
शुम्भ-निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती। 
धूम्र-विलोचन नयना, निशदिन मदमाती॥ जय अम्बे
चण्ड-मुण्ड संहारे शोणित बीज हरे। 
मधु-कैटभ दोऊ मारे, सुर भय दूर करे॥ जय अम्बे
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी। 
आगम-निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ जय अम्बे
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों। 
बाजत ताल मृदंगा, और बाजत डमरु॥ जय अम्बे
तुम हो जग की माता, तुम ही हो भरता। 
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ जय अम्बे
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। 
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ जय अम्बे
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। 
मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ जय अम्बे

श्री गंगा माता की आरती




श्री गंगा माता की आरती

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता । 
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता । 
चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता । 
शरण पड़े जो तेरी , सो नर तर जाता ॥ ॐ जय गंगे माता । 
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता । 
कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥ ॐ जय गंगे माता ।
एक ही बार जो तेरी, शरण गति आता । 
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता ॥ ॐ जय गंगे माता । 
आरति मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता ।
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता ॥
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता ।

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