शीतला सप्तमी 2019 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा
27 मार्च सुबह 06:28 से 18:37 तक.
शीतला सप्तमी के दिन शीतला माता की पूजा के समय उन्हें खास मीठे चावलों का भोग चढ़ाया जाता है. ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं. इन्हें पूजा से पहले रात में बनाया जाता है. इसी प्रसाद को घर में सभी सदस्यों को खिलाया जाता है. इस दिन घर में सुबह के समय कुछ और नहीं बनता.
शीतला सप्तमी की पूजा विधि
1. हर पूजा की तरह इसमें भी सुबह पहले स्नान करें.
2. इसके बाद शीतला माता की पूजा करें.
3. स्नान और पूजा के वक्त 'हृं श्रीं शीतलायै नमः' का उच्चारण करते रहें.
4. माता को भोग में रात के बने गुड़ वाले चावल चढ़ाएं.
5. व्रत में इन्हीं चावलों को खाएं.
मान्यता है कि शीतला माता ये व्रत रखने से बच्चों की सेहत अच्छी बनी रहती है. उन्हें किसी भी प्रकार का बुखार, आंखों के रोग और ठंड से होने वाली बीमारियां नहीं होती. इसके अलावा यह भी माना जाता है शीतला सप्तमी के बाद बासी भोजन नहीं किया जाता है. यह बासी भोजन का खाने का आखिरी दिन होता है. इसके बाद मौसम गर्म होता है इसीलिए ताज़ा खाना खाया जाता है.
हिंदू धर्म में प्रसिद्ध कथा के अनुसार एक दिन बूढ़ी औरत और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा. मान्यता के मुताबिक इस व्रत में बासी चावल चढ़ाए और खाए जाते हैं. लेकिन दोनों बहुओं ने सुबह ताज़ा खाना बना लिया. क्योंकि हाल ही में दोनों की संताने हुई थीं, इस वजह से दोनों को डर था कि बासी खाना उन्हें नुकसान ना पहुंचाए. सास को ताज़े खाने के बारे में पता चला तो वो बहुत नाराज़ हुई. कुछ क्षण ही गुज़रे थे, कि पता चला कि दोनों बहुओं की संतानों की अचानक मृत्यु हो गई. इस बात को जान सास ने दोनों बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया.

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