लेकिन बहुत सी ऐसी वस्तुएँ भी है जो और देवताओं को तो चढाई जाती है परन्तु भगवान आशुतोष की पूजा में उन्हें चढ़ाना पूर्णतया मना है शायद इसीलिए भूलवश या अज्ञानता वश शिव भक्तो को अपनी पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है |
हिंदु धर्म में शंख को बहुत ही पवित्र माना जाता है और लगभग सभी पूजा के कार्यों में शंख का प्रयोग होता है लेकिन भगवान शिव के शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना वर्जित है, उन्हें कभी भी शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए ।
तुलसी भी बहुत पवित्र मानी जाती है और लगभग सभी देवकार्यो में इसका प्रयोग होता है लेकिन तुलसी को भगवान भोलेनाथ पर चढ़ाना मना है |ऐसा बहुत से लोगो को पता ही नहीं है और वह नित्य भगवान शिव की पूजा में उन्हें तुलसी दल अर्पित करते है जिससे उनकी पूजा पूर्ण नहीं होती है।
धार्मिक कार्यों में कई पूजन कार्य हल्दी के बिना पूर्ण नहीं माने जाते। लेकिन भगवान शिव को हल्दी अर्पित नहीं की जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हल्दी स्त्री सौंदर्य प्रसाधन में प्रयोग में लायी जाती है और शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है,
इसी वजह से महादेव को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है।
भगवान भोलेनाथ को केतकी और केवड़े के फूल चढ़ाना भी मना है।
शिवजी की पूजा में बहुत से भक्तजन शिवलिंग पर लोहे या स्टील के लोटे / बर्तन से जल चढ़ाते है जो बिलकुल गलत है ।
भगवान भोलेनाथ पर हमेशा पीतल , कांसे या अष्टधातु के बर्तन / लोटे से ही जल चढ़ाना चाहिए लोहे या स्टील के बर्तन से नहीं ।
भगवान शिव को सफ़ेद रंग बहुत ही प्रिय है इसीलिए उन्हें यथासंभव सफ़ेद चन्दन से ही तिलक लगाना चाहिए , लाल या पीले चन्दन से नहीं ।
शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव की आराधना बेलपत्र के बिना पूरी नहीं होती।

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