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रविवार, 2 दिसंबर 2018

श्री बालाजी महाराज जी की आरती | श्री सालासर महाराज जी की आरती


श्री बालाजी महाराज जी की आरती | 
श्री सालासर महाराज जी की आरती



जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला ॥ 
चैत सुदी पूनम को जन्मे, अंजनी पवन खुशी मन में । 
प्रकट भए सुर वानर तन में, विदित यश विक्रम त्रिभुवन में । 
दूध पीवत स्तन मात के, नजर गई नभ ओर । 
तब जननी की गोद से पहुंच, उदयाचल पर भोर ।
अरुण फल लखि रवि मुख डाला ॥
कृपा कर सालासर वाला तिमिर भूमण्डल में छाई, चिबुक पर इंद्र वज्र बाए । 
तभी से हनुमत कहलाए, द्वय हनुमान नाम पाए । 
उस अवसर में रुक गयो, पवन सर्व उन्चास । 
इधर हो गयो अंधकार, उत रुक्यो विश्व को श्वास । 
भए ब्रह्मादिक बेहाला ।। 
कृपा कर सालासर वाला देव सब आए तुम्हारे आगे, सकल मिल विनय करन लागे । 
पवन कू भी लाए सांगे, क्रोध सब पवन तना भागे । 
सभी देवता वर दियो, अरज करी कर जोड़ ।
सुनके सबकी अरज गरज, लखि दिया रवि को छोड़ । 
हो गया जग में उजियाला ॥ 
कृपा कर सालासर वाला रहे सुग्रीव पास जाई, आ गए वन में रघुराई । 
हरी रावण सीतामाई, विकल फिरते दोनों भाई । 
विप्र रूप धरि राम को, कहा आप सब हाल । 
कपि पति से करवाई मित्रता, मार दिया कपि बाल । 
दुःख सुग्रीव तना टाला ॥ 
कृपा कर सालासर वाला आज्ञा ले रघुपति की धाया, लंक में सिंधु लांघ आया । 
हाल सीता का लख पाया, मुद्रिका दे वनफल खाया । 
वन विध्वंस दशकंध सुत, वध कर लंक जलाय । 
चूड़ामणि संदेश सिया का, दिया राम को आय । 
हुए खुश त्रिभुवन भूपाला ॥ 
कृपा कर सालासर वाला जोड़ी कपि दल रघुवर चाला, कटक हित सिंधु बांध डाला । 
युद्ध रच दीन्हा विकराला, कियो राक्षसकुल पैमाला । 
लक्ष्मण को शक्ति लगी, लायौ गिरी उठाय । 
देइ संजीवन लखन जियाए, रघुबर हर्ष सवाय । 
गरब सब रावन का गाला ॥ 
कृपा कर सालासर वाला रची अहिरावन ने माया, सोवते राम लखन लाया। 
बने वहां देवी की काया, करने को अपना चित चाया । 
अहिरावन रावन हत्यौ, फेर हाथ को हाथ । 
मंत्र विभीषण पाय आप को, हो गयो लंका नाथ । 
खुल गया करमा का ताला ॥ 
कृपा कर सालासर वाला अयोध्या राम राज्य कीना, आपको दास बना दीना । 
अतुल बल घृत सिंदूर दीना, लसत तन रूप रंग भीना । 
चिरंजीव प्रभु ने कियो, जग में दियो पुजाय । 
जो कोई निश्चय कर के ध्यावे, ताकी करो सहाय । 
कष्ट सब भक्तन का टाला ॥ 
कृपा कर सालासर वाला भक्तजन चरण कमल सेवे, जात आत सालासर देवे ।
ध्वजा नारियल भोग देवे, मनोरथ सिद्धि कर लेवे । 
कारज सारों भक्त के, सदा करो कल्याण । 
विप्र निवासी लक्ष्मणगढ़ के, बालकृष्ण धर ध्यान । 
नाम की जपे सदा माला ॥ कृपा कर सालासर वाला ।

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