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शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018

नवरात्र का चौथा दिन माँ दुर्गा के कूष्माण्डा स्वरूप की पूजा विधि

 नवरात्र का चौथा दिन माँ दुर्गा के कूष्माण्डा स्वरूप की पूजा विधि


maa kushmanda pooja vidhi


नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार का साम्राज्य था, तब देवी कुष्मांडा द्वारा ब्रह्माण्ड का जन्म होता है अतयह देवी कूष्माण्डा के रूप में विख्यात हुई हैं।  इस देवी का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं।
देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं अतइन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। देवी अपने इन हाथों में क्रमशकमण्डलु,  धनुष,  बाण,  कमल का फूल,  अमृत से भरा कलश,  चक्र और गदा व माला लिए हुए हैं। माता की वर मुद्रा  भक्तों को सभी प्रकार की ‘ऋद्धि-सिद्धि’  प्रदान करने वाली होती है। देवी सिंह पर सवार हैं भक्तों की रक्षा करती है। भक्त श्रद्धा पूर्वक चौथे दिन  मां कूष्मांडा की उपासना करते हैं। माता के पूजन से भक्तों के समस्त  प्रकार के  कष्ट रोग, शोक संतापों का अंत होता है तथा दिर्घायु एवं यश की  प्राप्ति  होती है।
चतुर्थी के दिन माँ कूष्मांडा की आराधना की जाती है। इनकी उपासना से  सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में चतुर्थ दिन इसका जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे माँसर्वत्र विराजमान और कूष्माण्डा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

माँ दुर्गा के कूष्माण्डा स्वरूप की पूजा विधि

सर्वप्रथम कलश और उसमें उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। तत्पश्चात माता के साथ अन्य देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए, इनकी पूजा के पश्चात देवी कूष्माण्डा की पूजा करनी चाहिए। पूजा की विधि शुरू करने से पूर्व हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम करना चाहिए। इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां कूष्माण्डा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा  करें | 

इसमें आवाहन,  आसन, पाद्य,  अध्र्य,  आचमन,  स्नान,  वस्त्र,  सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली,  हल्दी,  सिंदूर,  दुर्वा,  बिल्वपत्र,  आभूषण,  पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य,  धूप-दीप, नैवेद्य,  फल, पान, दक्षिणा,  आरती,  प्रदक्षिणा,  मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

ध्यान

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्तोत्र पाठ

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्।
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥

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